
ज्वालामुखी में आम आदमी पार्टी ने ग्रामीण स्तर पर शुरू किया सदस्यता अभियान…
ज्वालामुखी – शीतल शर्मा
अग्निपथ योजना को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। इस बीच केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के ख़िलाफ़ हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला के ज्वालामुखी में आम आदमी पार्टी ने भी मोर्चा खोल दिया है।
आम आदमी पार्टी एससी विंग के प्रदेश सयुंक्त सचिव होशियार सिंह भारती, पर्यटन विंग के प्रदेशाध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों ने ज्वालामुखी के एक निजी होटल के मीटिंग की। ज्वालामुखी विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के साथ लोगों को जोड़ने के लिए भी टिप्स दिए गए।
इसी बीच पार्टी पदाधिकारियों ने प्रेस कांफ्रेंस भी की और केंद्र सरकार द्वारा अग्निपथ योजना के खिलाफ जमकर बयानबाजी भी की। आप नेता होशियार सिंह भारती ने कहा कि अग्निपथ योजना केंद्र सरकार की सबसे बेकार योजना है। युवाओं के साथ मजाक किया जा रहा है।
भारती ने कहा युवा देश की रक्षा करना चाहता है। लेकिन मात्र चार साल की नौकरी देकर उनके भविष्य के साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है। भारती ने कहा कि हम चाहते हैं कि युवाओं को नोकरी मिले। हम इसके पक्ष में हैं कि युवाओं को सेना में भर्ती किया जा रहा है। लेकिन सेना में जो अग्निवीर भर्ती होंगे उनका सेवा कार्यकाल ज्यादा होना चाहिए।
अग्निवीर को सभी लाभ मिलने चाहिए जो अन्य सैनिकों को मिलते हैं। सेवानिवृत्त होने के बाद पेंशन का प्रावधान भी होना चाहिए। वहीं आप पर्यटन विंग के प्रदेशाध्यक्ष विकास धीमान व आप जिला उपाध्यक्ष रघुवीर सिंह स्याल ने अग्निपथ योजना का विरोध किया।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने रातोंरात इस योजना को देश पर थोपने का काम किया है। ये बेहद गंभीर विषय है कि आज देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा। देश की सेना के मान सम्मान की घज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिसकी वो कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। युवाओं के भविष्य के साथ धोखा किया जा रहा है इसलिए लोग सड़कों पर उतरे हैं। आपको देश की सुरक्षा के साथ इस कदर समझौता नहीं करना चाहिये।
आप के नेताओं सीताराम भाटिया, रामस्वरूप धनोटीया व नरेश कुमार मोनू ने कहा कि आज सेना का मनोबल टूटेगा। गैर राजनीतिक आंदोलन सड़कों पर विरोध कर रहे हैं और आज हम राजनीतिक दल यहां उनका समर्थन कर रहे हैं। जहां भी अन्याय होगा उसका विरोध होगा।
आज भर्ती प्रक्रिया में रातोंरात बदलाव कर दिया उसमें विपक्ष को विश्वास में नहीं लिया तो विपक्ष सड़कों पर नहीं तो फिर कहां उतरेगा। तीन कृषि कानून बिना चर्चा करके लाये थे उसका क्या नतीज़ा रहा वो वापस लेने पड़े। आज भी बिना चर्चा के ये योजना लाई गई है। इसे भी कृषि कानूनों की तरह वापस लेना पड़ेगा।
