
धर्मशाला – राजीव जसबाल
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड कर्मचारी संघ धर्मशाला की मांगों को बोर्ड प्रबंधन अनदेखा कर रहा है। बोर्ड प्रबंधन की ओर से न तो स्टाफ की भर्ती की जा रही है और न ही प्रोमोशन जैसे मसलों को हल किया जा रहा है।
इसके अलावा संघ आठ अप्रैल से अपनी मांगों को बोर्ड प्रबंधन के समक्ष रख रहा है, लेकिन इन पर कोई भी गौर नहीं किया जा रहा है।
यह बात यहां जारी एक प्रेस बयान में हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड कर्मचारी संघ धर्मशाला के अध्यक्ष बलवीर चंदेल और उपप्रधान नंदन उप्पल ने कही।
उन्होंने कहा कि कर्मचारी रोजाना शिक्षा बोर्ड परिसर में गेट मीटिंग करते हैं। 25 अप्रैल को भी कर्मचारी यूनियन ने मीटिंग कर अपनी मांगें रखीं।
उन्होंने बताया कि अब कर्मचारी अपनी मांगों को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के समक्ष रखेंगे, क्योंकि शिक्षा बोर्ड प्रशासन का रवैया उदासीन है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा बोर्ड कर्मचारियों को अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ की जिला इकाई ने भी समर्थन दे दिया है। एनजीओ के जिलाध्यक्ष अजय खट्टा ने पहले ही शिक्षा बोर्ड को सात दिन का समय दिया है।
उन्होंने कहा कि बोर्ड अगर कर्मचारियों को सात दिन के भीतर वार्ता के लिए नहीं बुलाता है तो एनजीओ सख्त कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा बोर्ड प्रशासन ने कर्मचारियों को एक पत्र जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि वे विरोध प्रदर्शन नहीं कर सकते हैं। इस पत्र को कर्मचारियों ने गलत करार दिया है।
डॉ. सुरेश कुमार सोनी, अध्यक्ष, एचपी बोर्ड धर्मशाला के बोल
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने पिछले तीन साल में 188 कर्मचारियों को प्रोमोशन का तोहफा दिया है। जहां तक कर्मचारी संघ अन्य प्रोमोशन देने की बात कर रहे है तो इनका मामला वरिष्ठता को लेकर न्यायालय में चला हुआ है। जब तक कोई फैसला नहीं आता, तब तक बोर्ड इस संदर्भ में कोई निर्णय नहीं ले सकता। वहीं जेओए आईटी की कुछ भर्तियों के लिए कर्मचारी चयन बोर्ड को लिखा है।
