भांग की खेती रोकने को हिमाचल में नशीली दवा रोकथाम नीति तय

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शिमला- जसपाल ठाकुर

हिमाचल प्रदेश में नशे की तस्करी और भांग की अवैध खेती को रोकने समेत निगरानी को लेकर नशीली दवा रोकथाम नीति तय हो गई है। राज्य सरकार नशे पर अब जीरो टॉलरेंस नीति पर काम करेगी। इस बारे में सरकार की मंजूरी के बाद पॉलिसी तैयार हो गई है।

इसमें नशा तस्करी और नशीले पदार्थों की पैदावार को रोकने के लिए ग्रामीण स्तर से लेकर विभागाधिकारियों तक की जिम्मेदारी तय की गई है। इसमें तमाम विभागों को जिम्मदारियां सौंपी गई हैं। प्रदेश में अब अफीम पोस्त और भांग की अवैध खेती की जांच की रूपरेखा तय हो गई है।

एनडीपीएस अधिनियम के अनुसार, अफीम पोस्त और भांग की खेती धारा 18 और धारा 20 के तहत आपराधिक श्रेणी में होंगी। इसमें राज्य और केंद्र सरकार के सभी अधिकारियों को अधिकार दिया गया है कि वे इस संबंध में प्रवेश, तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी कर पाएंगे।

मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट या कोई भी मजिस्ट्रेट राज्य सरकार या धारा 42 के तहत राजपत्रित रैंक के अधिकारी जांच कर सकते हैं और जांच में खेती अवैध पाई जाती है, तो वे इसे नष्ट करने के आदेश दे सकते हैं। इसमें जमीन के मालिक को अवैध भांग या अफीम की खेती के संबंध में जानकारी देनी होगी।

यदि कोई भूमि मालिक इस संबंध में जानकारी नहीं देता है, तो उसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही ग्रामीण स्तर पर वार्ड सदस्य और प्रधानों को भी इसकी जानकारी देने का अधिकार दिया गया है।

एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। राज्य कर और उत्पाद शुल्क को नोडल एजेंसी केंद्रीय नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, के साथ भांग और अफीम के लिए विनाश अभियान शुरू करेगा।

इस दौरान बड़े उत्पादकों समेत अवैध काश्तकारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राज्य क्षेत्र की खुफिया जानकारी एकत्र करने और अवैध खेती को नष्ट करने के लिए जिम्मेदार होगा। ऐसे मामलों में पुलिस काश्तकारों ग्राम अधिकारियों और गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ  कानूनी कार्रवाई करेगी।

वन विभाग को भी यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे क्षेत्र के अधीन भांग की खेती को नष्ट करने के लिए समय-समय पर अभियान चलाए।  इसके साथ ही नशा निवारण बोर्ड के गठन को लेकर भी मजबूती से काम किया जाएगा, ताकि नशे की लत में आ चुके युवाओं को बाहर निकाला जा सके।

ग्रामीण क्षेत्रों में कॉमन सर्विस सेंटर शिकायत केंद्र के रूप में काम करेंगे। आबकारी एवं कराधान विभाग के प्रधान सचिव सुभासीष पांडा ने बताया कि पॉलिसी को लेकर अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसमें तमाम विभाग और पंचायत स्तर के लोगों को नशे की रोकथाम की जिम्मेदारी दी गई है। इसमें सभी विभाग उत्तरदायी रहेंगे और भांग या अफीम की अवैध खेती करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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