
जिला भर में बार-बार हो रहे हादसों से प्रशासन-लोक निर्माण विभाग ने आज तक नहीं लिया कोई सबक
चम्बा- भूषण गुरुंग
जिला चंबा की सर्पीली सड़कों की खराब हालत के चलते सफर काफी रिस्की होकर रह गया है। चंबा-पठानकोट एनएच सहित जिला के विभिन्न मुख्य व संपर्क मार्गों पर कई ऐसे ब्लैक स्पॉट हैं, जहां जरा सी लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
पूर्व में इन जगहों पर कई खूनी हादसों में सैकड़ों लोग अकारण ही मौत के मुंह में समा चुके हैं। मगर हर हादसे के बाद मार्गों की हालत में सुधार लाने के दावे केवल फाइलों तक ही सिमट कर रह गया है। इन दिनों पठानकोट एनएच सहित जिला के विभिन्न मुख्य मार्गों के विस्तारीकरण के चलते सफर और भी जोखिम भरा हो गया है। बारिश के दिनों में पहाडिय़ों के दरकने से मलबा व पत्थर गिरने का सिलसिला कब आरंभ हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता।
जिला में पठानकोट एनएच पर ऐसे ब्लैक स्पॉट हैं, जहां सावधानी हटी, दुर्घटना घटी वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। पठानकोट एनएच पर केरू पहाड़ के अलावा शहर के एंट्री प्वाइंट पर हेलिपैड का निचला हिस्सा और मैहला के पास की ढांक हर वक्त वाहन चालकों व राहगीरों के सिर पर मौत बनकर मंडरा रही है।
इसके अलावा पठानकोट एनएच पर गड्ढों का साम्राज्य होने से कई दोपहिया वाहन चालक हादसे का शिकार होकर अस्पताल पहुंच चुके हैं। वर्तमान में जिला के एकमात्र पठानकोट एनएच की हालत काफी खराब हो चुकी है। चंबा-तीसा मुख्य मार्ग का विस्तारीकरण भी वाहन चालकों के लिए आफत बन गया है। मार्ग की कटिंग कार्य के चलते कई डेंजर प्वाइंट बन चुके हैं, जहां जरा सी लापरवाही मौत को दावत दे रही है।
चंबा-खजियार-जोत मार्ग पर भी विस्तारीकरण के कार्य भी लोगों के सफर को रिस्की बना रहा है। पूर्व में इन मार्गों के तंगहाल हिस्से पर दर्जनों हादसे हो चुके हैं। इसके अलावा जिला के संपर्क मार्र्गांे की हालत भी काफी खराब हो चुकी है। मार्गों के निर्माण कार्यों से पहाड़ दरक रहे हैं। मार्गों के निर्माण कार्य में बरती गई अनियमितताओं के चलते बारिश के दिनों में कटिंग का मलबा निचले हिस्से के रिहायशी क्षेत्रों में तबाही मचा रहा है, मगर सरकार व विभाग खामोश हैं।
जिला के विभिन्न सड़क मार्गों पर 858 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं। इनमें 644 ब्लैक स्पॉट के सुधारीकरण किया गया है। हालांकि अभी भी 214 ब्लैक स्पॉट का सुधार किया जा रहा है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी द्वारा 19 ब्लैक स्पॉट ठीक किए गए हैं और नौ पर सुधार कार्य को अंजाम दिया जा रहा है। ये आंकड़े सरकार की ओर से जारी किए गए हैं, लेकिन हकीकत इनसे कोसों दूर है।
