
शिमला- जसपाल ठाकुर
पुलिस जवानों की वेतन विसंगति से जुड़े मसले पर वित्त विभाग सभी पहलुओं को खंगालने में जुटा है। सूचना के अनुसार जल्द ही विभाग इस संंबंध में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप देगा। इसके साथ ही पुलिस मुख्यालय की तरफ से भी पूरी जानकारी गृह विभाग को सौंपी जा चुकी है।
ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले समय में सरकार पुलिस जवानों को बड़ी राहत प्रदान कर सकती है। देखा जाए तो वेतन विसंगति से जुड़े मसले पर जवानों द्वारा मुख्यमंत्री से लेकर डीजीपी के नाम कई खुले पत्र जारी किए जा चुके हैं। इसके साथ ही जस्टिस फॉर एचपी पुलिस शीर्षक से मीडिया में भी लगातार अलग-अलग नामों से ई-मेल जारी की जा रही हैं।
इसी कड़ी में बीते दिन मुख्यमंत्री और डीजीपी के नाम भेजे एक खुले पत्र में कहा गया है कि आगामी कैबिनेट की बैठक में यदि कोई फैसला नहीं आया तो खाना छोड़ कर ड्यूटी करेंगे, साथ में यह कहा गया है कि अब सड़कों पर उतरना ही बाकी रह गया है। यदि ऐसा होता है तो इसके लिए जिम्मेदारी खुद सरकार और प्रशासन की होगी।
मुख्यमंत्री उचित फैसला लेकर प्रदान करें राहत
पुलिस जवानों ने आग्रह किया है कि जायज मांग को लेेकर जल्द उचित कदम उठाया जाए क्योंकि यह मामला 5000 जवानों के साथ-साथ उनके परिवारों से जुड़ा है। ऐसे में मुख्यमंत्री जिनके पास गृह मंत्रालय भी है, वह आगामी कैबिनेट की बैठक में उचित फैसला लेकर वेतन विसंगति के मसले पर राहत प्रदान करें।
क्या है मसला
पुलिस जवान 8 साल की बजाय 2 साल बाद संशोधित वेतन देने की मांग कर रहे हैं। तर्क है कि सरकार ने जेसीसी की बैठक में अनुबंध काल को 3 से 2 साल करने का फैसला लिया है, ऐसे में 2 साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद जब अन्य विभागों के कर्मचारियों को पूरा वेतनमान दिया जा सकता है तो 2015 के बाद भर्ती हुए पुलिस जवानों को संशोधित वेतनमान प्रदान करने के लिए 8 साल के सेवाकाल का राइडर क्यों नहीं हटाया जा सकता।
क्या बोले डीजीपी
डीजीपी संजय कुंडू ने बताया कि इस मामले में सरकार ही उचित जानकारी दे सकती है। विभाग की तरफ से सरकार को जो जानकारी दी जानी थी, वह उपलब्ध करवा दी गई है।
