हिमाचल के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने मनेई में परमार्थ इको विलेज का भूमि पूजन किया, पर्यावरण संरक्षण के लिए एक लाख पौधे लगाने का संकल्प लिया, भूमि दान करने वाले राकेश और दिनेश सहित संजय धीमान व रूमी देवी सम्मानित।
शाहपुर – नितिश पठानियां
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल श्री कविंद्र गुप्ता ने आज कांगड़ा जिला के मनेई (भद्रेला) में ‘परमार्थ इको विलेज’ का भूमि पूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और मानवीय सेवा के क्षेत्र में इस परियोजना को एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवनशैली अपनाने का प्रेरणादायक केंद्र बनेगा।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि आज केवल एक परियोजना की आधारशिला नहीं रखी जा रही, बल्कि प्रकृति और मानवता के बीच संतुलन स्थापित करने वाले एक ऐसे विचार की नींव रखी जा रही है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं।
उन्होंने भारतीय संस्कृति में प्रकृति के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी परंपरा में पृथ्वी को माता, नदियों को जीवनदायिनी, पर्वतों को देवस्वरूप और वृक्षों को जीवन का आधार माना गया है। हम प्रकृति के स्वामी नहीं, बल्कि उसके संरक्षक हैं। इसलिए हमारा दायित्व है कि धरती को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और समृद्ध रूप में सौंपें।
राज्यपाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज पूरी दुनिया के सामने गंभीर चुनौती है। इसका समाधान केवल सरकारी नीतियों और योजनाओं से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जीवनशैली, सोच और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना होगा। उन्होंने कहा कि ‘परमार्थ इको विलेज’ जैसी पहल पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
उन्होंने सुझाव दिया कि इस परियोजना को एक जीवंत शिक्षण एवं प्रेरणा केंद्र के रूप में विकसित किया जाए, जहां विद्यार्थी, किसान, शोधकर्ता, युवा उद्यमी, स्वयं सहायता समूह और समाज के विभिन्न वर्ग प्रकृति के अनुकूल जीवनशैली को समझने के साथ उसे अपने व्यवहार में भी अपना सकें।
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘एक पेड़ मां के नाम’, स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन, अमृत सरोवर अभियान और मिशन लाइफ जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का साझा दायित्व है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्य के लिए पर्यावरण संरक्षण का विशेष महत्व है। यहां की नदियां, वन, हिमालयी पारिस्थितिकी, जैव विविधता और प्राकृतिक जल स्रोत अमूल्य धरोहर हैं। इनके संरक्षण के साथ पर्यटन, कृषि, बागवानी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को इस प्रकार बढ़ावा देना होगा, जिससे प्रकृति पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि ‘परमार्थ इको विलेज’ में जैविक खेती, स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक ज्ञान, प्राकृतिक जीवनशैली और पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे क्षेत्र के किसानों, महिलाओं, युवाओं, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उद्यमियों के लिए आजीविका के नए अवसर भी सृजित होंगे।
राज्यपाल ने परम पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी को नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन आध्यात्मिक साधना, मानव सेवा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण का प्रेरक उदाहरण है। ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन के माध्यम से उन्होंने आध्यात्मिक चेतना को सामाजिक उत्तरदायित्व और प्रकृति संरक्षण से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्वामी जी का मार्गदर्शन और आशीर्वाद ‘परमार्थ इको विलेज’ को विशिष्ट पहचान प्रदान करेगा तथा यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण और मानवीय सेवा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेगी।
उन्होंने इस महत्वपूर्ण परियोजना की परिकल्पना और इसे साकार करने के प्रयासों के लिए वृंदा फाउंडेशन ट्रस्ट की सराहना की। विशेष रूप से ट्रस्ट की संरक्षक डॉ. मेघना चौधरी को उनकी दूरदृष्टि, प्रतिबद्धता और इस पहल के लिए बधाई दी।
इस अवसर पर राज्यपाल ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक लाख पौधे लगाने के संकल्प का शुभारंभ पौधारोपण करके किया। उन्होंने इको विलेज के निर्माण के लिए भूमि दान करने वाले राकेश और दिनेश को सम्मानित कर उनके योगदान की सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय चित्रकार संजय धीमान तथा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहीं स्थानीय पर्यावरण संरक्षक रूमी देवी को भी सम्मानित किया गया।
ये रहे उपस्थित
इस अवसर पर स्वामी दिव्यानंद पुरी महाराज, पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश के.के. शर्मा, पूर्व जिला न्यायाधीश अनिल, डॉ. मेघना चौधरी, फाउंडेशन के सदस्य राहुल शर्मा, संजीव सिंह, प्रमोद कुमार, आशीष कुमार एवं गौरांश सिरोही सहित डॉ. नीलू शर्मा, डॉ. गौतम पठानिया और प्रोफेसर अनुपम सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

