पहाड़ी भाषा के प्रचार-प्रसार और संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में पहाड़ी भाषा अकादमी स्थापित करने की मांग उठाई गई है, इससे पहाड़ी भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाने में मदद मिल सकती है।
हिमखबर डेस्क
पहाड़ी भाषा के प्रचार-प्रसार और संरक्षण के लिए राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में पहाड़ी भाषा अकादमी स्थापित करने की मांग उठी है। अखिल भारतीय हिमाचल सामाजिक संस्था संघ ने अपने 107वें वार्षिक समारोह के दूसरे दिन आयोजित कार्यक्रम में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से दिल्ली में पहाड़ी भाषा अकादमी स्थापित करने का अनुरोध किया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री केएम लाल की अध्यक्षता में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों की तर्ज पर नई दिल्ली में भी पहाड़ी भाषा अकादमी स्थापित की जानी चाहिए। इससे महानगरों में रहने वाली और यहां जन्मी युवा पहाड़ी पीढ़ी अपनी भाषा, संस्कृति और जड़ों से जुड़ी रह सकेगी। साथ ही, पहाड़ी भाषा का अन्य समुदायों के बीच भी प्रचार-प्रसार किया जा सकेगा।
दिल्ली में पहाड़ी महोत्सव आयोजित करने की मांग
संघ ने नई दिल्ली में पहाड़ी महोत्सव आयोजित करने की मांग भी उठाई। प्रस्ताव में कहा गया कि पहाड़ी संस्कृति, लोककला और परंपराओं को व्यापक मंच उपलब्ध करवाया जाना चाहिए।
इसके अलावा, पहाड़ी कलाकारों को ‘फेस्टिवल ऑफ इंडिया’ के तहत विदेशों में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के अवसर उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया गया। इससे हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मदद मिल सकती है।
पठानकोट-जोगिंदरनगर रेल सेवा सुचारु करने का आग्रह
समारोह में पठानकोट-जोगिंदरनगर रेलवे लाइन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संघ ने प्रस्ताव पारित कर संबंधित अधिकारियों से इस रेल सेवा को सुचारु रूप से चलाने का अनुरोध किया।
प्रस्ताव में कहा गया कि यह रेलवे लाइन अक्सर बाधित रहती है, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। रेल सेवा नियमित रूप से संचालित होने से क्षेत्र के लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिल सकती है।
हिमाचल को नशे के चंगुल से निकालने पर जोर
हिमाचल प्रदेश में बढ़ती नशे की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए संघ ने इसके खिलाफ व्यापक स्तर पर कदम उठाने की मांग की। प्रस्ताव में सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक और सरकारी स्तर पर मिलकर प्रभावी प्रयास करने का अनुरोध किया गया।
संघ का मानना है कि नशे के खिलाफ जनजागरूकता बढ़ाने और समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी से इस समस्या पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।
जलाशयों में स्टीम बोट सुविधा और पर्यटन को बढ़ावा देने की मांग
हिमाचल प्रदेश में पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए संघ ने गोविंद सागर झील की तर्ज पर प्रदेश के अन्य जलाशयों में भी स्टीम बोट सुविधा उपलब्ध करवाने की मांग की।
इसके साथ ही उत्तराखंड की तर्ज पर हिमाचल में साहसिक और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने का आग्रह किया गया। संघ का कहना है कि पर्यटन सुविधाओं के विस्तार से प्रदेश में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ सकती है और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
प्रवासी हिमाचलियों के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले सम्मानित
समारोह के दौरान प्रवासी हिमाचलियों के उत्थान और विकास के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में देशभर से करीब दो दर्जन हिमाचली सामाजिक संस्थाओं ने भाग लिया।
समारोह में पारित प्रस्तावों के माध्यम से पहाड़ी भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण, हिमाचल में पर्यटन विकास, बेहतर रेल सेवा और नशे के खिलाफ सामूहिक प्रयासों जैसे महत्वपूर्ण विषयों को उठाया गया।

