हिमाचल प्रदेश में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां 42 साल से फरार चल रहे 69 वर्षीय भगोड़े को गिरफ्तार किया गया, बताया जा रहा है कि वह कई साल तक सरकारी नौकरी करता रहा और उसके परिवार का नाम वोटर लिस्ट में भी दर्ज था।
सिरमौर – नरेश कुमार राधे
42 साल पहले से ये कहानी शुरू होती है। 27 साल की उम्र में एक शख्स ठगी करता है और फिर फरार हो जाता है। वह शख्स हिमाचल प्रदेश में अपना ठिकाना बनाता है, यहीं पर शादी और सरकारी नौकरी के अलावा, आराम से जिंदगी गुजार रहा था, लेकिन कहते हैं कि हर किसी को अपने कर्मों की सजा इसी जन्म में भगुतनी पड़ती है। हुआ भी ऐसा ही। पुलिस ने शख्स को गिरफ्तार कर लिया है।
जानकारी के अनुसार, सिरमौर जिला के नाहन में कोच के रूप में जिंदगी बिता रहे 69 वर्षीय विजय कुमार यादव को राजस्थान की उदयपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वर्ष 1984 में दर्ज धोखाधड़ी के एक मामले में फरार चल रहे विजय कुमार को नाहन के चौगान मैदान से धर दबोचा।
आरोपी तक पहुंचने के लिए पुलिस टीम ने अलग रणनीति अपनाई। पुलिसकर्मी खिलाड़ी बनकर मैदान में पहुंचे और कोच से मदद मांगते हुए बातचीत शुरू की। पहचान की पुष्टि होने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। विजय कुमार इस मामले में उद्घोषित अपराधी था और पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थी।
आरोपी लंबे समय से नाहन में रह रहा था और खेल गतिविधियों से जुड़ा हुआ था। वह जवाहर नवोदय विद्यालय में फुटबाल कोच के रूप में सेवाएं देने के बाद वर्ष 2018 में सेवानिवृत्त हो गया था। इसके बावजूद खेलों से उसका जुड़ाव बना रहा और वह स्थानीय क्लबों के साथ एथलैटिक्स कोच के रूप में काम कर रहा था। इसी दौरान उदयपुर पुलिस ने उसकी तलाश में नाहन पहुंचकर चौगान मैदान में कार्रवाई की।
मामले की शुरूआत 5 मार्च 1984 को हुई थी, जब भंवर सिंह नामक व्यक्ति ने राजस्थान के उदयपुर स्थित धनमंडी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में विजय कुमार यादव और उसके साथियों पर ‘किनारा ग्रुप’ व ‘अग्रवाल सेल्स’ के नाम से संस्था चलाने और केंद्र सरकार से मंजूरी प्राप्त होने का दावा करने का आरोप लगाया गया था।
शिकायत के अनुसार आरोपियों ने बेरोजगार लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिया और प्रत्येक व्यक्ति से 3,000 रुपए वसूले। आरोप है कि करीब 32,000 रुपए एकत्र करने के बाद कार्यालय बंद कर दिया गया और आरोपी वहां से फरार हो गए। पुलिस ने उस समय मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था, लेकिन विजय कुमार यादव हाथ नहीं आया। बाद में उसे उद्घोषित अपराधी घोषित कर दिया गया और उसकी तलाश जारी रही।
हरियाणा के कई राज्यों में रहा, फिर नाहन में बसाया घर
जानकारी के अनुसार विजय कुमार यादव मूल रूप से हरियाणा के भिवानी जिले के रूपगढ़ का रहने वाला है। गिरफ्तारी से बचने के दौरान उसके पुराने रिकॉर्ड और पुश्तैनी दस्तावेजों में बदलाव करवाने की कोशिश किए जाने का भी उल्लेख सामने आया है। वह अलग-अलग राज्यों में रहा और कोचिंग के काम से जुड़ा रहा। बाद में वह नाहन में आकर बस गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उसने यहां परिवार सहित घर बसाया और यही रहने लगा। स्थानीय स्तर पर उसकी पहचान खेल प्रशिक्षक के रूप में बन गई।
तकनीकी जांच और पारिवारिक संपर्कों से मिला सुराग
धनमंडी थाना पुलिस के अनुसार आरोपी का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच के साथ मैनुअल पड़ताल भी की गई। उसके पैतृक गांव रूपगढ़ में पारिवारिक संपर्कों से जुड़े सुराग जांच में मददगार बने। इन्हीं जानकारियों के आधार पर राजस्थान पुलिस की टीम नाहन पहुंची और स्थानीय पुलिस के सहयोग से गिरफ्तारी की कार्रवाई पूरी की।
एसपी सिरमौर एनएस नेगी के बोल
एसपी सिरमौर एनएस नेगी ने भी गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि राजस्थान पुलिस ने स्थानीय पुलिस की सहायता से पुराने मामले में फरार चल रहे आरोपी को गिरफ्तार किया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई राजस्थान पुलिस द्वारा की जा रही है। आरोपी पर लगे आरोपों के संबंध में अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।



