‘The Pride of Himachal’ – IPS रानी बिंदु सचदेवा की कहानी: कुर्सी से नहीं, उसूलों से बनाई अलग पहचान

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IPS रानी बिंदु सचदेवा के प्रेरणादायक सफर की कहानी, जानिए कैसे उन्होंने अपने सिद्धांतों, कार्यशैली और व्यक्तित्व से अलग पहचान बनाई।

शाहपुर – नितिश पठानियां

कुछ व्यक्तित्व अपनी पहचान पद और प्रतिष्ठा से बनाते हैं, तो कुछ अपने काम, सिद्धांतों और आत्मसम्मान से। हिमाचल प्रदेश पुलिस की वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रानी बिंदु सचदेवा का सफर भी इसी सोच को सामने लाता है। उनकी शैक्षणिक उपलब्धियां, पुलिस सेवा में अनुभव और प्रशिक्षण के क्षेत्र में योगदान उन्हें The Pride of Himachal की प्रेरणादायक शख्सियतों में शामिल करता है।

रानी बिंदु सचदेवा वर्तमान में हिमाचल प्रदेश पुलिस में आईजी क्राइम के पद पर तैनात हैं। मूल रूप से कांगड़ा जिले से संबंध रखने वाली रानी बिंदु का परिवार बाद में पंचकूला में बस गया। उन्होंने सोलन से दसवीं और शिमला के सेंट बीड्स कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की।

इसके बाद अर्थशास्त्र में एमफिल और पीएचडी की पढ़ाई की। पीएचडी के दौरान ही उनका चयन हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा में हो गया था। शिक्षा के क्षेत्र में भी उनके पास करियर बनाने का अवसर था और सरस्वती नगर कॉलेज में लेक्चरर के पद पर उनका चयन हुआ था।

उन्होंने प्रशासनिक सेवा का रास्ता चुना और आगे चलकर पुलिस विभाग में अपनी अलग पहचान बनाई। रानी बिंदु सचदेवा हिमाचल प्रदेश पुलिस सेवा में शामिल होने वाली दूसरी महिला अधिकारी बनीं। बतौर डीएसपी उनकी पहली तैनाती नालागढ़ में हुई। अपनी योग्यता और अनुभव के दम पर आगे बढ़ते हुए वर्ष 2006 में उन्हें आईपीएस कैडर मिला।

उनके करियर से जुड़ी पुरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने बद्दी में एसपी के रूप में भी सेवाएं दीं। बाद में चंबा तबादले के बाद उन्होंने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का विकल्प चुना। उनका यह सफर बताता है कि करियर में आगे बढ़ने के कई रास्ते हो सकते हैं और हर व्यक्ति अपने फैसलों से अपनी दिशा तय करता है।

रानी बिंदु सचदेवा ने चंडीगढ़ स्थित केंद्रीय गृह मंत्रालय के केंद्रीय गुप्तचर प्रशिक्षण संस्थान में निदेशक की जिम्मेदारी भी संभाली। उनकी सेवा उपलब्धियों में पुलिस पदक और महानिदेशक प्रशंसा चक्र (DG’s Disc-2) जैसे सम्मान शामिल हैं।

श्रीलंका पुलिस के अधिकारियों के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम संचालित करने के लिए उन्हें डीजी डिस्क प्रदान किए जाने का भी उल्लेख मिलता है। यह उनके प्रशिक्षण संबंधी योगदान और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान साझा करने के अनुभव को दर्शाता है।

उनकी यात्रा युवाओं, खासकर बेटियों के लिए प्रेरणा है कि शिक्षा, मेहनत और आत्मविश्वास के सहारे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ा जा सकता है। सफलता केवल ऊंचा पद हासिल करने में नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों को समझने और अपने काम के प्रति समर्पित रहने में भी है।

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