हिमाचल प्रदेश में जमीन और संपत्ति की रजिस्ट्री से जुड़े स्टांप ड्यूटी नियमों में बदलाव प्रस्तावित है। महिलाओं को एक करोड़ रुपये तक की संपत्ति पर 4 फीसदी स्टांप ड्यूटी का प्रावधान किया गया है, जबकि पारिवारिक हस्तांतरण पर केवल 0.1 फीसदी शुल्क प्रस्तावित है।
हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश में जमीन और संपत्ति की खरीद-फरोख्त, रजिस्ट्री तथा पारिवारिक हस्तांतरण से जुड़े स्टांप ड्यूटी के नियम बदलने जा रहे हैं। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने विधानसभा के मानसून सत्र में भारतीय स्टांप (हिमाचल प्रदेश द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया।
सरकार का तर्क है कि 1899 के पुराने कानून में समय-समय पर हुए छोटे-छोटे संशोधनों से नियम जटिल हो गए थे। अब पुरानी सूची को हटाकर सरल और नई अनुसूची 1-क लागू करने का प्रस्ताव है। नई व्यवस्था में महिला के नाम एक करोड़ रुपये तक की संपत्ति की रजिस्ट्री या दान में मिली संपत्ति पर चार प्रतिशत स्टांप ड्यूटी लगेगी।
एक करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति पर यह दर आठ प्रतिशत होगी। वहीं पुरुषों और अन्य श्रेणी के लोगों के लिए 40 लाख रुपये तक की संपत्ति पर छह प्रतिशत तथा इससे अधिक पर आठ प्रतिशत स्टांप ड्यूटी प्रस्तावित है।
परिवार में संपत्ति देना अब बेहद सस्ता
पति-पत्नी और रक्त संबंधों, जैसे माता-पिता से बच्चों के बीच संपत्ति हस्तांतरण पर धारा 118 के मामलों में 12 प्रतिशत शुल्क
राज्य सरकार से जमीन खरीदने या पट्टे पर लेने के लिए धारा 118 के तहत विशेष मंजूरी वाले मामलों में महिला और पुरुष के लिए समान दर रखी गई है। ऐसे मामलों में 12 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी देनी होगी।ड़ी राहत दी गई है। ऐसे पारिवारिक हस्तांतरण में संपत्ति के कुल मूल्य का केवल 0.1 प्रतिशत स्टांप शुल्क लिया जाएगा।
आम दस्तावेजों के शुल्क में भी बदलाव
आम दस्तावेजों के शुल्क में भी बदलाव किया गया है। तहसीलों में बनने वाले हलफनामे के लिए 100 रुपये और गोद लेने के दस्तावेज (एडोप्शन डीड) के लिए 2,000 रुपये स्टांप शुल्क प्रस्तावित है।

