मंडी – अजय सूर्या
मंडी जिला में 30 जून और 1 जुलाई को आई भीषण बारिश ने जहां कई घरों को मलबे में तब्दील कर दिया, वहीं एक 11 महीने की मासूम बच्ची निकिता से उसका पूरा संसार छीन गया। मां-बाप और दादी की मौत के बाद यह बच्ची इस संसार में बिल्कुल अकेली रह गई। लेकिन दुख की इस घड़ी में पूरे देश ने इस मासूम पर स्नेह और संवेदनाओं की बारिश कर दी।
इसी बीच सुंदरनगर उपमंडल के उप्पर बेहली गांव के रहने वाले जेबीटी शिक्षक यवेश राणा ने एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक फैसला लिया है। यवेश राणा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर ऐलान किया कि “वे निकिता के नाम से खोले गए बैंक खाते में हर महीने अपनी सैलरी से ₹1000 जमा करेंगे, जब तक वह 18 वर्ष की आयु पूरी नहीं कर लेती।”
सराज विधानसभा क्षेत्र के परवाड़ा गांव में यह दर्दनाक हादसा उस समय हुआ जब नाले के किनारे बसे रमेश के परिवार पर कुदरत का कहर टूट पड़ा। 30 जून की रात को भारी बारिश के चलते नाले का जलस्तर अचानक खतरनाक रूप से बढ़ गया।
रमेश, उनकी पत्नी राधा और बुजुर्ग मां पूर्णू देवी बहाव को मोड़ने के लिए घर के पीछे गए थे, लेकिन वह तीनों तेज पानी की चपेट में आकर बह गए। घर के भीतर उस समय उनकी 11 महीने की बेटी निकिता अकेली सो रही थी। चमत्कारिक रूप से घर को नुकसान नहीं पहुंचा और स्थानीय लोगों ने निकिता को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। लेकिन इस त्रासदी ने निकिता को पूरी तरह से अनाथ कर दिया।
इस मार्मिक घटना से जब यवेश राणा अवगत हुए, तो उन्होंने तुरंत आगे आकर इस बच्ची के जीवन को संवारने का संकल्प लिया। एमबीएम न्यूज़ नेटवर्क से बातचीत में उन्होंने कहा “जब मैंने यह खबर पढ़ी तो मेरा दिल कांप उठा। मैं खुद एक पिता हूं, और एक पिता ही जान सकता है कि एक मासूम का ऐसे अनाथ होना कितना बड़ा दुख होता है। मुझे लगा कि ये बच्ची अब हम सबकी जिम्मेदारी है।”
पेशे से शिक्षक यवेश, राष्ट्रीय स्तर पर 10 बार वॉलीबॉल खेल चुके हैं और एक माह के बेटे के पिता हैं। उन्होंने जो संवेदनशीलता और इंसानियत दिखाई है, वह समाज के लिए एक मिसाल बन गई है। सोशल मीडिया पर यवेश राणा के इस कदम की खूब सराहना हो रही है।
उनकी पोस्ट को हजारों लोग शेयर कर चुके हैं और कई लोग निकिता की मदद के लिए आगे आने की अपील कर रहे हैं। फिलहाल निकिता सुरक्षित है और उसका बैंक खाता भी सक्रिय कर दिया गया है, जिसमें लोग आर्थिक सहायता भेज सकते हैं।