बोर्ड में बने रहेंगे मनरेगा मज़दूर – भूपेंद्र

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44वीं बैठक में विधि विभाग की रॉय और यूनियनों की मांग पर हुआ फ़ैसला, यूनियनों की सँयुक्त संघर्ष समिति ने स्थगित किया आंदोलन

मंडी – अजय सूर्या 

मनरेगा मजदूरों को राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड की सदस्यता औऱ वित्तिय सहायता पर लगी रोक को हटाने का निर्णय 44वीं बोर्ड बैठक में पारित हो गया है। जिससे पिछले तीन साल की रुकी हुई वित्तिय सहायता और डेढ़ साल से उनका पंजीकरण औऱ नवीनीकरण पुनः शुरू हो जायेगा। ये जानकारी बोर्ड के सदस्य व सीटू से सबंधित मनरेगा व निर्माण यूनियन के राज्य महासचिव भूपेंद्र सिंह ने दी।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 के सितंबर माह में तत्कालीन बोर्ड सचिव ने बिना सरकार की अनुमति के मौखिक रूप में इस पर रोक लगा दी थी और उसके बाद सत्ता परिवर्तन के बाद 12 दिसंबर को उन्होंने इसके बारे लिखित रूप में आदेश जारी कर दिए थे और तब से लेकर अब तक ये जारी थे।

इस गैर कानूनी रोक को हटाने के लिए सीटू से सबंधित मनरेगा व निर्माण मज़दूर यूनियन पिछले एक साल से मांग कर रही थी जिसके लिए सभी प्रकार के अधिकारियों औऱ जनप्रतिनिधियों से पैरवी करने के अलावा सड़कों पर उतर कर भी प्रदर्शन कर रही थी और तीन महीने पहले सभी यूनियनें इसके लिए एकजुट हो गई थी और सँयुक्त संघर्ष छेड़ दिया था।

भूपेंद्र सिंह ने बताया कि वे बोर्ड की बैठक में इस बारे पिछले साल हुई पहली बैठक से ही मुद्दा उठाते रहे हैं और पिछली बैठक जो 1 मार्च को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई थी उसमें भी इसे प्रमुखता से उठाया था और अब पिछले कल जारी हुई बोर्ड की कार्यवाही में इस रोक को हटाने का निर्णय जारी कर दिया गया है। जो सीटू और अन्य मजदूर यूनियनों के स्टैंड पर लाखों मजदूरों के लिए खुशखबरी है और उन्हें अब सभी प्रकार के लंबित लाभ बोर्ड से मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

भूपेंद्र सिंह ने बताया कि इस बहाली के लिए हिमाचल सरकार के विधि विभाग की रॉय आने के बाद ये सब संभव हुआ है जिसने साफ तौर पर कहा है कि 1996 में बने भवन एवं अन्य निर्माण कामगार कल्याण क़ानून की धारा 12(1) में स्पष्ट रूप में कहा है कि कोई भी मज़दूर जो भवन एव अन्य निर्माण का काम पिछले एक साल में 90 दिनों से अधिक काम करता है, वह पंजीकरण और वित्तिय सहायता के लिए पात्र होता है और निर्माण कार्य का ब्यौरा धारा 12(ई) में दिया गया और पिछले दस साल से इसी आधार पर बोर्ड में पंजीकरण हुआ है और लाभ मिलते थे लेकिन दो साल पहले इस पर गैर कानूनी तौर पर अधिकारियों ने रोक लगा दी थी और वर्तमान सरकार के कार्यकाल में ये प्रमुख मुद्दा बना हुआ था।

लेकिन अब सभी स्तरों पर इस बारे चर्चा होने के बाद ये फ़ैसला क़ानून के अनुसार यूनियनों की मांग के आधार पर मजदूरों के पक्ष में हुआ है जिससे अब सवा लाख मजदूरों के रुके हुए वित्तिय लाभ जारी हो जाएंगे और मनरेगा मज़दूरों का पंजीकरण औऱ नवीनीकरण भी शुरू हो जायेगा। इसलिए सयुंक्त संघर्ष समिति ने 15 मॉर्च से पँचायत स्तर पर शुरू होने वाले आंदोलन को रद्द करने का फ़ैसला किया है।

भूपेंद्र सिंह ने कहा कि ग्राम पंचायतों में मनरेगा और अन्य मद्दों जैसे वितायोग, विधायक व सांसद निधि, प्राकृतिक आपदा, स्वछता इत्यादि योजनाओं के तहत भी निर्माण कार्य होते हैं और बहुत से मज़दूर नीजि रिहायशी भवन निर्माण का कार्य और राष्ट्रीय उच्च मार्गों, फोरलेन व हाईडल परियोजनाओं में भी मजदूरी करते हैं वे सभी बोर्ड के सदस्य बन सकते हैं।

उन्होंने बोर्ड के सचिव से मांग की है कि वे अब जल्दी श्रम कल्याण अधिकारियों की एक राज्य स्तरीय बैठक बुलाएं और इस फ़ैसले को तुरंत लागू करने के लिए उन्हें निर्देश दें। उन्होंने उनसे ये भी मांग की है कि ज़िला स्तर पर नवनियुक्त श्रम कल्याण अधिकारी अपने अपने तरीके से मज़दूरों से रोज़गार प्रमाण पत्र ले रहे हैं जिससे वर्तमान में फ़ार्म जमा ही नहीं हो रहे हैं इसलिए उनकी तुरंत बैठक बुलाई जाये।

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