धर्मशाला – व्यूरो रिपोर्ट
कार का बीमा करवाने के बावजूद जरूरत के समय बीमा का पूरा क्लेम न देने वाली इंश्योरेंस कंपनी को ब्याज सहित पूरी राशि देनी होगी। यह आदेश जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य नारायण ठाकुर व आरती सूद की अदालत में सुनाए।
इसके अलावा बीमा कंपनी को मुआवजा और अदालती शुल्क भी देना होगा। जानकारी के अनुसार रमेश चंद पुत्र दुनी राम निवासी सुनेहड़ नगरोटा बगवां ने उपभोक्ता आयोग में दर्ज करवाई शिकायत में बताया कि कार की इंश्योरेंस आईसीआईसीआई बीमा कंपनी से करवाई थी।
18 फरवरी, 2021 को सड़क दुर्घटना में कार क्षतिग्रस्त हो गई। इसकी सूचना कंपनी को देने के बाद उन्होंने संत आटो व्हील प्राइवेट लिमिटेड पालमपुर से कार की मरम्मत करवाई। कार की मरम्मत का बिल दो लाख 15 हजार 91 रुपये बना।
जब कार लेने गए तो 37 हजार 37 रुपये मांगे। कहा गया कि इंश्योरेंस कंपनी ने सिर्फ एक लाख 78 हजार 54 रुपये ही स्वीकृत किए हैं। उन्होंने पैसे देकर कार ले ली।
जब बीमा कंपनी से पूछा गया तो कई तरह के तर्क बीमा कंपनी की ओर से दिए जाने लगे। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायत की।
आयोग के समक्ष दोनों पक्षों की ओर से पेश साक्ष्यों के आधार पर बीमा कंपनी को 31, 412 रुपये नौ प्रतिशत ब्याज की दर से देने के आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा कंपनी ग्राहक को 10 हजार रुपये बतौर मुआवजा और 10 हजार रुपये अदालती शुल्क भी देना होगा।

