
व्यूरो रिपोर्ट
पूर्व पंचायत समिति सदस्य एवं वर्तमान उपप्रधान पंचायत डोल भटहेड़ साधू राम राणा ने प्रेस वार्ता में कहा कि इस बार के हिमाचल विधानसभा चुनावों में यदि सत्ता परिवर्तन होता है तो इसका मुख्य कारण कर्मचारियों का मौजूदा भाजपा सरकार के खिलाफ पुरानी पैंशन बहाली को लेकर विरोध और कांग्रेस पार्टी को समर्थन ही रहेगा।
क्योंकि कि हिमाचल के सरकारी कर्मचारी पुरानी पैंशन बहाली के मुद्दे को पिछले काफी समय से भाजपा सरकार के समक्ष उठा रहे थे लेकिन भाजपा सरकार द्वारा वित्तीय स्थिति का हवाला देकर इस मुद्दे को सिरे से खारिज करते हुए जहां तक यह कहकर कर्मचारियों को जलील किया गया कि यदि विधायकों की तरह पैंशन का लाभ लेना है तो नौकरी नौकरी छोड़कर कर्मचारी चुनाव लड़ें।
अतः इस आधार पर हिमाचल में सरकारी कर्मचारियों ने भाजपा सरकार को घर बैठाने एवं कांग्रेस पार्टी जो सरकारी कर्मचारियों की पुरानी पैंशन बहाली का समर्थन करते हुए पुरानी पैंशन बहाली को कांग्रेस पार्टी की सरकार बनते ही देने की बचनबद्धता दे रही है सत्ता में बैठाने केलिए जी जान से चुनावों में समर्थन करते देखे गए।
अब यदि मौजूदा चुनावों में भाजपा सत्ता से बाहर और कांग्रेस पार्टी सत्ता के सिंहासन पर विराजमान होती है तो इस समस्त उल्टफेर का श्रेय हिमाचल के सरकारी कर्मचारियों को मिलना तय माना जा रहा है और फिर भाजपा का राज्यों में केंद्र का शीर्ष नेतृत्व आगामी लोकसभा चुनावों में सरकारी कर्मचारियों जिनकी देश में बहुत बड़ी तादाद के पक्ष में है।
पुरानी पैंशन बहाली करके अपना खोया हुआ वोटबैंक वापिस लाने के लिए 2024 के चुनावों से पूर्व पुरानी पैंशन बहाली की घोषणा करने की संभावनाएं सरकारी कर्मचारियों के पक्ष में देखने को मिल सकती हैं।
