26 मार्च को चंडीगढ़ व रामगढ में दिखाए गए प्रश्नपत्र, सिरमौर में चार ने ख़रीदा पेपर

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सिरमौर – नरेश कुमार राधे 

हिमाचल प्रदेश में पुलिस कांस्टेबल भर्ती के प्रश्न पत्र को लीक करने के लिए बेहद ही शातिराना तरीका अपनाया गया।

हालांकि इस मामले में कोई भी अधिकारिक तौर पर बात करने को तैयार नहीं है, लेकिन बताया जा रहा है कि प्रश्न पत्र को दिखाने के लिए 26 मार्च को एक दिन पहले अभ्यर्थियों को चंडीगढ़ के आस-पास बुलाया गया था।

सिरमौर में जांच के दौरान यह पता चला है कि 4 अभ्यर्थियों द्वारा प्रश्न पत्र को लेकर सौदेबाजी की गई थी। 8 लाख में सौदा तय हुआ था। 2 को प्रश्नपत्र रामगढ़ में दिखाया गया, जबकि दो को चंडीगढ़ के आसपास दिखाया गया।

साफ तौर पर जाहिर हो रहा है कि हिमाचल कांस्टेबल भर्ती के प्रश्नपत्र लीक होने के मामले के तार हरियाणा से जुड़े हुए हैं। ऐसा माना जा रहा है कि प्रश्न पत्र दिखाने के लिए अभ्यर्थियों को हिमाचल से बाहर ही बुलाया गया।

एक दिन पहले ही प्रश्न पत्र दिखाने के पीछे यह मकसद था कि अभ्यर्थियों से ही आगे बात लीक न हो जाये। यह साफ होना बाकी है कि अभ्यर्थियों को उत्तर कुंजी दी गई थी या नहीं।

पुख्ता सूत्रों ने एमबीएम न्यूज नेटवर्क को यह भी बताया कि प्रश्न पत्र दिखाने से पहले अभ्यर्थियों से मोबाइल पर लोकेशन शेयर हुई थी। सौदा निपटने के बाद तुरंत ही दलालों ने अभ्यर्थियों के मोबाइल से डाटा डिलीट कर दिया था।

सूत्रों का यह भी कहना है कि सिरमौर के 4 अभ्यर्थियों ने कैश के रूप में ही दलालों को एडवांस राशि के तौर पर 8 में से 4 लाख अदा किए थे। बाकी राशि परीक्षा में अंतिम रूप से चयन के बाद दी जानी थी।

सूत्रों का यह भी कहना है कि पेपर लीक होने की 2 संभावनाएं जताई जा रही है। पहली, यह कि पेपर को प्रिंटिंग प्रेस से ही लीक किया गया होगा, दूसरा बिंदु पुलिस मुख्यालय के तरफ भी है। मुख्यालय से ही ये तय होना था कि कौन सा प्रश्न पत्र प्रिंटिंग के लिए भेजा जाना

काफी हद तक यह तय माना जा रहा है कि अभ्यर्थियों को प्रश्न पत्र दिखाने के लिए सीमा पार ही बुलाया गया था, क्योंकि प्रश्नपत्र को बेहद ही शातिराना तरीके से लीक करना था ताकि कोई सुराग न बचे। लिहाजा हरियाणा के दलालों के गिरेबान तक पहुंचने में खाकी को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है।

जानकारों का कहना है कि अभ्यर्थियों को प्रश्न पत्र 26 मार्च को दिखाया गया। ऐसे में अगर टीम सौदेबाजी वाली जगह पर पहुंचती भी है,तो वहां सौदेबाजी से जुड़े सुराग मिलने की संभावना कम है, क्योंकि समय काफी चुका है।

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