हिमख़बर डेस्क
वर्ष 2026 में रंगों का पर्व होली के एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है तथा उसी लिहाज से आज यानी दो मार्च को रात्रि समय होलिका दहन किया जाएगा।
शाहपुर के ज्योतिषी पंडित आचार्य अमित कुमार शर्मा के अनुसार 2 मार्च को शाम 5:55 बजे भद्रा काल आरंभ होगा जो 3 मार्च सुबह 4:28 बजे तक रहेगा।
इस बार भद्रा भूलोक और सिंह राशि में स्थित रहेगी, इसलिए प्रदोष काल में होलिका पूजन और दहन करना शास्त्रों के अनुसार उत्तम और शुभ माना जाएगा।
उन्होंने बताया कि फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर होलिका दहन होता है तथा भद्रा काल में दान-पुण्य करना भी फलदायी माना जाता है।
होलिका दहन का मुहूर्त
शाहपुर के ज्योतिषी आचार्य पंडित अमित कुमार शर्मा ने बताया कि 2 मार्च को प्रदोष काल में शाम 6:22 मिनट से रात 8:53 मिनट के बीच होलिका दहन करना सबसे शुभ रहेगा।
होलिका दहन की कथा
प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नाम का असुर रहा करता था, जो भगवान विष्णु से नफरत करता था। हिरण्यकश्यप का एक पुत्र था प्रह्लाद जो भगवान विष्णु का परम भक्त था और भगवान की पूजा में लीन रहता है।
बालक प्रह्लाद की भक्ति देखकर हिरण्यकश्यप ने उसे मारने का निर्णय लिया। हिरण्यकश्यप ने हर वो कोशिश की जिससे वह प्रह्लाद को मार सके लेकिन प्रह्लाद हर बार बच जाता था। हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की मदद लेने की सोची।
होलिका को यह वरदान प्राप्त था कि अग्नि उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को होलिका की गोद में बैठाकर आग लगा दी।
भगवान विष्णु की कृपा से होलिका जलकर भस्म हो गई और प्रह्लाद बच गया। इसके बाद से ही बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में होलिका दहन किया जाने लगा।

