
शिमला – जसपाल ठाकुर
हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण स्तर पर स्वरोजगार की राह आसान कर रहे 60,000 से अधिक स्वयं सहायता समूहों की अब कंपनी बनाई जाएगी। समूहों से जुड़ीं प्रदेश भर की 3.73 लाख महिलाओं को कारोबार बढ़ाने में नाबार्ड मदद करेगा।
पांच वर्षों के लिए एक करोड़ रुपये तक का कंपनी में निवेश किया जाएगा। कंपनी के तैयार उत्पादों में सुधार लाकर बाजार भी उपलब्ध करवाने में नाबार्ड मदद करेगा।
प्रदेश में हर स्वयं सहायता समूह छोटे-छोटे स्तर पर हथकरघा, हैंडलूम से लेकर खाने-पीने का सामान तैयार करता है। छोटे स्तर पर कार्य करने के चलते इन समूहों को अपना सामान बेचने के लिए उचित बाजार नहीं मिल पाता है।
ऐसे में नाबार्ड ने अब कई स्वयं सहायता समूहों को एकत्र कर इनकी एक कंपनी बनाने का फैसला लिया है। इसके तहत एक तरह का कारोबार करने वाले समूहों की कंपनी बनाई जाएगी।
इन कंपनियों को केंद्र सरकार की ओर से नाबार्ड ऋण देगा। उत्पादों में सुधार लाने के लिए विशेषज्ञों का मार्गदर्शन भी मिलेगा। इन उत्पादों की बिक्री के लिए बाजार का भी बंदोबस्त किया जाएगा।
कंपनी के उत्पादों के अनुसार नाबार्ड की ओर से निवेश किया जाएगा। नाबार्ड देश भर के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के सशक्तीकरण पर कार्य करता है।
नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. सुधांशु केके मिश्रा ने बताया कि बीते दिनों शिवरात्रि मेले के दौरान मंडी में नाबार्ड की प्रदर्शनियों में पांच दिन में 30 लाख रुपये के उत्पाद बिके थे।
लोगों में स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को लेकर बहुत उत्साह है। ऐसे में नाबार्ड इन समूहों को और अधिक मजबूत करने के लिए इनकी एक कंपनी बनाएगा।
मंडी के गोहर और कल्पा से होगी शुरुआत
मंडी जिले के गोहर और किन्नौर के कल्पा में कार्यरत स्वयं सहायता समूहों की कंपनी बनाने की शुरुआत होगी। नाबार्ड के विशेष दल की ओर से गोहर क्षेत्र में चल रहे समूहों के कारोबार को लेकर जानकारियां जुटाई जा रही हैं।
किन्नौर में जेएसडब्ल्यू कंपनी की मदद से कंपनी बनाने की योजना है। इसके अलावा सामुदायिक घासनियों को वाटरशेड के रूप में भी तैयार करने की योजना है। जल्द ही इस बाबत नाबार्ड की ओर से फैसला ले लिया जाएगा।
