शिमला – नितिश पठानियां
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि सरकार जल्दी ही स्वास्थ्य क्षेत्र में 200 डॉक्टरों की भर्ती करने जा रही है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र पर सरकार का पूरा फोकस है और आने वाले समय में तीन हजार करोड़ रूपए इस क्षेत्र में खर्च किए जाएंगे। यहां के मेडिकल कॉलेजों में एम्स स्तर की चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
सदन में मंगलवार को भाजपा के विधायक डॉ जनक राज ने नियम 62 के तहत आईसीएमआर के द्वारा दिए गए एक प्रोजेक्ट का मामला उठाया था जिसपर सीएम ने सदन में जवाब दिया।
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि निदेशालय चिकित्सा शिक्षा के तहत आईजीएमसी को स्टेमी प्रोजेक्ट में 71 लाख रूपए प्राप्त हुए थे जबकि विधायक 26 लाख बता रहे। इस राशि में से 43 लाख रूपए हार्ट अटैक से बचाने वाले इंजेक्शन की खरीद पर खर्च किए गए हैं।
सीएचसी व पीएचसी नोटिफाई की गई थी शिमला जिला में ताकि वहां पर इंजेक्शन लगाया जाए ह्रदयरोगियों के लिए। उन्होंने कहा कि आईसीएमआर ने जो पैसा दिया वो उसी प्रोजेक्ट पर खर्च करना होता है।
नवम्बर 2024 तक इंजेक्शन की उपलब्धता पूरी थी इस वजह से नए नहीं खरीदे गए। इस इंजेक्शन की एक्सपायरी शॉर्ट टाइम की है लिहाजा ज्यादा नहीं खरीद सकते हैं।
उन्होंने कहा कि आईसीएमआर ने बची हुई शेष राशि को वापस मांग लिया था जिस राशि का इस्तेमाल नहीं किया गया। यह राशि उनको ब्याज के साथ वापस भेज दी गई है।
सीएम ने कहा कि केन्द्र सरकार ने तय कर रखा है कि किसी काम के लिए आया पैसा जो बैंक में होता है उसका इस्तेमाल नहीं होने पर ब्याज सहित वो राशि वापस देनी पड़ती है।
भारत सरकार जिस प्रोजेक्ट के लिए पैसा देगी वो उसी पर खर्च होगा और इसका यूसी भी देना पड़ता है। स्पर्श प्रोजेक्ट के तहत केंद्र सरकार ने शर्तें लगा रखी हैं कि पैसा उसी प्रोजेक्ट पर खर्च होगा।
उन्होंने कहा कि सरकार का पहला केन्द्र बिंदू शिक्षा है और दूसरा स्वास्थ्य क्षेत्र है। एक साल के अंदर एम्स जैसी सुविधाएं यहां के मैडिकल कॉलेजों में प्रदान की जाएगी।
पहले चरण में इन मैडिकल कॉलेजों के लिए 3 हजार करोड़ का टैक्नोलॉजी बेस्ड प्रोजेक्ट बनाया जा रहा है। सरकार ने 200 डॉक्टर भर्ती किए है और 200 डॉक्टर जल्दी ही भर्ती किए जाएंगे।
इससे पूर्व डॉ जनक राज ने कहा कि प्रोजेक्ट में 26 लाख रूपए खर्च नहीं किए गए। आईसीएमआर ने प्रदेश में एक प्रतिष्ठित संस्थान को स्टेमी प्रोजेक्ट के तहत राशि दी थी। केन्द्र सरकार के सौजन्य से 26 लाख रूपए की राशि इंजेक्शन खरीदने को दिया था जोकि 55 हजार का होता है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल में हार्ट अटैक से 14.29 फीसदी मौतें होती हैं। 6 घंटे के भीतर यह इंजेक्शन लगाया जाए तो व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है। 2013 में 22 फीसदी लोग ही 6 घंटे के समय में पहुंचे थे जिनको बचाया जा सका।
पिछले दो साल में प्रदेश सरकार ने किसी भी चिकित्सा शोध के लिए कोई धनराशि जारी नहीं की और जो राशि केन्द्र से आई उसका भी उपयोग नहीं कर सके हैं। जनक राज ने कहा कि ह्रदय रोगियों के प्रति सरकार गंभीर नहीं है।