हिमाचल में अब तैयार होंगे चंदन के जंगल

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व्यूरो, रिपोर्ट

बेशकीमती चंदन अब निचले हिमाचल के किसानों की आर्थिकी मजबूत करेगा। कुछ साल पहले कर्नाटक से लाए चंदन के पौधों पर रिसर्च के साथ उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी के विशेषज्ञों ने उन्नत किस्म के पौधों की नर्सरी तैयार की है। पूजा-पाठ के अलावा चंदन का औषधीय प्रयोग भी होता है। प्रति किलो इसकी कीमत हजारों में होती है।

विशेषज्ञ समय-समय पर किसानों को चंदन के पेड़ से होने वाली आय के बारे में भी जागरूक कर रहे हैं। नेरी स्थित राजकीय उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय के समीप खग्गल गांव में चंदन की नर्सरी भी तैयार की गई है। इस नर्सरी में महाविद्यालय ने चंदन के करीब चार हजार पौधे तैयार किए हैं।

इन पौधों को बरसात के मौसम में किसानों में वितरित किया जाएगा। चंदन के एक पौधे की कीमत महज 40 रुपये निर्धारित की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि साल में दो बार अप्रैल और अक्तूबर में चंदन के बीज तैयार होते हैं। इन बीजों को नर्सरी में रोप कर पौधे तैयार किए जाते हैं। हालांकि, छोटे पौधों का संरक्षण काफी कठिन है, जिसके चलते बागवानी एवं उद्यानिकी विशेषज्ञ किसानों को डेढ़ साल से अधिक उम्र के पौधों को खरीदने की सलाह देते हैं ताकि किसानों को इन पौधों के संरक्षण में कठिनाई न हो।

चार से चौदह हजार रुपये प्रति किलो है चंदन की कीमत
चंदन का पेड़ 7 से लेकर 25 वर्ष के बाद अलग-अलग कीमत पर बिकता है। एक किलो चंदन की कीमत बाजार में चार से लेकर चौदह हजार रुपये तक है। पूजा-पाठ के अलावा दवा उद्योग में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। दिन-प्रतिदिन बढ़ती मांग और कीमत के चलते विशेषज्ञ किसानों को चंदन के पेड़ उगाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं ताकि किसानों की आर्थिकी मजबूत हो सके।

खग्गल स्थित फार्महाउस में चंदन के चार हजार के करीब पौधों की नर्सरी तैयार की है। बरसात के मौसम में इन पौधों की रोपाई होती है। किसानों की आर्थिकी मजबूत करने के लिए यह एक अच्छा जरिया है। – डॉ. कमल शर्मा, राजकीय उद्यानकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी के डीन

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