हिमाचल के प्रसिद्ध मेलों में होती है पहाड़ी कलाकारों की अनदेखी

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शिमला – नितिश पठानियां 

प्रदेश में मनाए जाने वाले प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक मेलों की सांस्कृतिक संध्याओं को ठेके पर दिए जाने से ग्रामीण परिवेश के उभरते कलाकार क्षुब्ध है।

हाल ही में संपन्न हुए अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेला मंडी व राज्य स्तरीय मेला बैजनाथ में अपर शिमला के अनेक कलाकारों को मौका न मिलने पर इनके द्वारा मेला समिति पर कई सवाल उठाए हैं।

कलाकारों का कहना है कि पहाड़ी नाईटों को भी अब ठेके पर दिया जा रहा है जोकि दुर्भाग्यपूण है। संस्कृति का ज्ञान न होने के बावजूद भी ठेकेदार अपनी इच्छानुसार कलाकारों का चयन करते है।

जिससे विशेषकर बिना राजनीतिक पहुंच वाले कलाकार अपनी कला दिखाने से वंचित रह जाते हैं। जो कार्य भाषा एवं संस्कृति तथा लोक संपर्क विभाग को करना चाहिए वह कार्य अब एडीएम और एसडीएम करने लगे हैं।

प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा संस्कृति के दलालों को बुलाकर कलाकारों की बोली की जाती है। जिसमें ठेकेदार की मनमानी की वजह से कलाकारों को अपना उचित मेहनताना भी नहीं मिल पाता है।

अनेक कलाकारों के नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मेला समिति द्वारा औपचारिकता के लिए कलाकारों की ऑडिशन करवाई जाती है उसमें भी भाई भतीजावाद व राजनीतिक दबाव बना रहता है।

इनका कहना है कि स्थापित कलाकारों को ऑडिशन में बुलाने का कोई औचित्य नहीं होता है। कलाकारों ने बताया कि शिवरात्रि मेला में कार्यक्रम प्रस्तुत करने के लिए ऑडिशन केवल मंडी व बैजनाथ में रखी गई थी।

जिसके लिए शिमला, सोलन, सिरमौर के कलाकारों को इतनी दूर जेब से पैसे खर्च कर जाना पड़ता है। चयन होने पर पहाड़ी कलाकार को तीन से पांच हजार रूपये का मानदेय मिलता है जिससे ज्यादा वह जेब से खर्च कर लेते हैं।

इनका आरोप है कि मुंबईया कलाकारों पर प्रशासन समिति लाखों रूपये ठेकेदार के माध्यम से लुटाती है परंतु प्रदेश के कलाकारों को कुछ चंद रूपयों पर ही संतोष करना पड़ता है।

दूसरी ओर राजनेताओं की सिफारिशों पर बेसुरे कलाकारों को मंच पर अच्छा समय और मानदेय मिलता है जबकि अन्य पहाड़ी कलाकारों को मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए तीन से पांच मिनट का समय मिलता है।

कलाकारों ने मांग की है कि अंतर्राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तरीय मेलों में कलाकरों के चयन के लिए हर जिला के भाषा विभाग कार्यालय में केंद्र खोले जाने चाहिए, ताकि कलाकार आसानी से ऑडिशन दे सके।

इसके अलावा कलाकारों का यह भी कहना है कि प्रदेश के स्थापित कलाकारों को उनके अनुभव को देखते हुए उचित पारिश्रमिक दिया जाना चाहिए।

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