
हाई कोर्ट ने आठ मई, 2020 को जारी वरिष्ठता सूची फिर बनाने के दिए आदेश दी व्यवस्था, कार्यकारी निर्देश पर आरएंडपी नियम नहीं बदल सकती सरकार
शिमला – नितिश पठानियां
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने आठ मई, 2020 को जारी कानूनगो की वरिष्ठता सूची के आधार पर पदोन्नत किए नायब तहसीलदारों की नियुक्तियां रद्द करने के आदेश जारी किए हैं। कोर्ट ने कानूनगो की आठ मई, 2020 को जारी वरिष्ठता सूची को रद्द करते इसे पुन: जारी करने के आदेश दिए।
न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने यह व्यवस्था दी कि राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए कार्यकारी निर्देश भर्ती एवं पदोन्नति नियमों की जगह नहीं ले सकते। कोर्ट ने 10 जुलाई, 1997 को कानूनगो की वरिष्ठता सूची को निर्धारित करने बाबत जारी किए गए कार्यकारी निर्देशों को गैरकानूनी ठहराते हुए व कानूनगो की वरिष्ठता सूची पुन: जारी करने के आदेश दिए।
ऊना जिला के प्रार्थी कुलदीप कुमार व अन्यों ने प्रदेश उच्च न्यायालय के समक्ष याचिका दाखिल कर 20, फरवरी, 2020 को राज्य सरकार द्वारा जारी पत्र को यह कहकर चुनौती दी थी कि यह भर्ती एवं पदोन्नति नियम 1992 के विपरीत जारी किया गया है।
पत्र जारी करने के पीछे 30 जून, 1997 को राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए कार्यकारी निर्देशों का हवाला दिया गया था। जिसके तहत कानूनगो की वरिष्ठता सूची बदल दी गई और निजी तौर पर बनाए गए प्रतिवादियों को उनसे ऊपर वरिष्ठता सूची में स्थान दे दिया गया।
याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार प्रार्थियों को वर्ष 1998 में भर्ती एवं पदोन्नति नियम 1992 के तहत पटवारी के पदों पर नियुक्त किया गया था। उनकी वरिष्ठता नियम 15 ( ए) व 15 (बी) के तहत निर्धारित की गई थी। प्रार्थियों की दलील थी कि कार्यकारी निर्देश भर्ती एवं पदोन्नति नियमों की जगह नहीं ले सकते।
प्रदेश उच्च न्यायालय ने प्रार्थियों की दलीलों से सहमति जताते हुए उनकी याचिका को स्वीकार कर लिया। कार्यकारी निर्देशों के आधार पर जारी की गई वरिष्ठता सूची को रद्द करते हुए कानूनगो की वरिष्ठता सूची पुन: जारी करने के आदेश जारी किए।
यही नहीं, कार्यकारी निर्देशों के आधार पर जारी की गई वरिष्ठता सूची के तहत दी गई पदोन्नतियों को भी प्रदेश उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया। प्रदेश उच्च न्यायालय ने पदोन्नतियों के लिए रिव्यू डीपीसी करने के आदेश जारी कर दिए।
