हिमखबर डेस्क
देशभर में स्मार्ट मीटर को लेकर काफी विरोध देखने को मिला। लोगों का कहना था कि स्मार्ट मीटर लगने से उनका बिजली का बिल अधिक आएगा।
वहीं, कई ऐसी खबरें भी वायरल हुईं जहां ग्राहकों को स्मार्ट मीटर लगवाने के बाद भारी भरकम बिल थमा दिए गए। इस सब के बीच लोगों ने स्मार्ट मीटरों को जमकर विरोध किया और रैलियां भी निकालीं। लेकिन अब स्मार्ट मीटर को लेकर सरकार का बयान आ गया है।
सरकार ने लोकसभा में कहा कि देश में बिजली के प्रीपेड स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं, बल्कि वैकल्पिक हैं और जो उपभोक्ता स्मार्ट मीटर लगाना चाहते हैं उन्हें ही यह सुविधा दी जाएगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कहीं जबरन स्मार्ट मीटर नहीं लगाए जा रहे हैं। केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने गुरुवार को लोकसभा में एक पूरक प्रश्न के जवाब में कहा कि प्रीपेड बिजली मीटर स्मार्ट व्यवस्था वैकल्पिक व्यवस्था है।
और इस सुविधा का फायदा जो उपभोक्ता लेना चाहता है यदि उसका लाभ उपभोक्ता लेना चाहता है तो उसको यह दिया जाएगा और इसके लिए उसे पहले सिक्योरिटी देनी पड़ेगी और यदि वह बाद में प्रीपेड वापस लेता है तो उसकी सिक्योरिटी भी वापस कर दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि सिक्योरिटी का प्रावधान वैकल्पिक है आवश्यक नहीं है। उपभोक्ता जब चाहे उसे हटा सकता है और अपनी सुविधा अनुसार बिजली सुविधा का लाभ ले सकता है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रीपेड मीटर से कई राज्यों को लाभ हुआ है। उन्होंने कहा कि कहीं भी कोई प्रीपेड मीटर जबरन नहीं लगाया जा रहा है और यदि कहीं ऐसी सूचना है तो उसे पर ध्यान दिया जाएगा।
उनका कहना था कि कई राज्यों में डिफाल्टर उपभोक्ता लंबे समय से बिजली का बिल नहीं दे रहे हैं उनके लिए आवश्यक कर दिया गया है कि जब तक बिजली का बिल नहीं देंगे तब तक वहां बिजली सुविधा नहीं दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि जहां प्रीपेड हुआ है वहां कंपनियों का घाटा कम हुआ है और हर उपभोक्ता बिजली का भुगतान कर रहा है जबकि पहले यह उल्टा था लोग बिजली का बिल न भरना स्वाभिमान की बात मानते थे।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि सरकार बिजली की चोरी रोकने के लिए कदम उठा रही है और इसमें जो भी जरूरी होगा उपाय किए जाएंगे।

