शिमला – नितिश पठानियां
हिमाचल हाईकोर्ट में सुक्खू सरकार के संस्थान बंद करने के फैसले पर 16 मई को सुनवाई होगी। अदालत ने इस तरह की सभी याचिकाओं को एक साथ सुनने के आदेश दिए है। कार्यवाहक न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश विरेंदर सिंह की खंडपीठ ने दोनों पक्षों को दस्तावेज पूरे करने के आदेश दिए हैं।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार ने जसवां प्रागपुर विधानसभा क्षेत्र के कोटला बेहड़ और रक्कड़ में उप दंडाधिकारी कार्यालय खोला था। लेकिन सरकार ने गत 12 दिसंबर को जारी प्रशासनिक आदेशों के आधार पर दोनों कार्यालयों को बंद कर दिया। आरोप लगाया गया है कि बिना कैबिनेट बनाए ही पूर्व कैबिनेट के फैसलों को रद्द किया जा रहा है।
याचिका में की गई ये दलील
याचिका में दलील दी गई कि सरकार की ओर से जारी प्रशासनिक आदेशों से कैबिनेट के फैसलों को निरस्त करना गैर कानूनी है। जबकि, भारतीय संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। अदालत को बताया गया कि गत 12 दिसंबर को सरकार ने सभी विभागों के अधिकारियों को दिया गया पुनर्रोजगार समाप्त कर दिया। इसी तरह एक अप्रैल 2022 के बाद कैबिनेट में लिए गए सभी फैसलों की भी समीक्षा किए जाने का निर्णय लिया गया।
प्रशासनिक आदेश को रद्द करने की अपील
निगमों, बोर्डों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, नामित सदस्यों और अन्य कमेटियों तथा शहरी निकायों में नामित सदस्यों की नियुक्तियां भी रद्द कर दी गई। जिन अधिकारियों व कर्मचारियों के तबादले किए गए थे और उन पर अमल न किए जाने का निर्णय भी लिया गया था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि सरकार द्वेष की भावना से कार्य कर रही है। याचिकाकर्ता ने सरकार के 12 दिसंबर को जारी प्रशासनिक आदेश को रद्द करने की गुहार लगाई है।
सुक्खू सरकार ने लिया बड़ा फैसला
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ऐलान किया था कि प्रदेश में उन स्कूलों को बंद किया जाएगा जिसमें छात्र या शिक्षक नहीं हैं। उ्नहोंने कहा कि जिन स्कूलों में विद्यार्थी नहीं थे, केवल शिक्षक ही सेवाएं दे रहे थे, उन्हें बंद कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि रामपुर के एक स्कूल में केवल दो छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे थे और उन्हें पढ़ाने के लिए वहां पांच अध्यापक सेवाएं दे रहे थे।

