सीटू व किसान सभा ने किया एलान, 5 अप्रैल की दिल्ली रैली में प्रदेश से हजारों मजदूर किसान लेंगे भाग 

--Advertisement--

Image

शिमला – नितिश पठानियां 

केंद्र की मोदी सरकार की मजदूर, किसान व जनत विरोधी नेरतियों के खिलाफ हिमाचल प्रदेश के जिला व ब्लॉक मुख्यालयों पर सीटू व हिमाचल किसान सभा के नेतृत्व में प्रदेशव्यापी प्रदर्शन किए गए। इन प्रदर्शनों में हज़ारों मजदूरों किसानों ने भाग लिया।

सीटू व किसान सभा ने एलान किया है कि 5 अप्रैल की दिल्ली रैली में प्रदेश से हजारों मजदूर किसान भाग लेंगे। सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, महासचिव प्रेम गौतम, किसान सभा अध्यक्ष डॉ कुलदीप तंवर व महासचिव होतम सौंखला ने कहा है कि केन्द्र की मोदी सरकार की नवउदारवादी व पूंजीपति परस्त नीतियों के चलते बेरोजगारी, गरीबी, असमानता व रोजी रोटी का संकट बढ़ रहा है।

जनता की अपनी अवश्यकताओं की पूर्ति के लिए खर्च करने की क्षमता घट रही है। बेरोजगारी व महंगाई से गरीबी व भुखमरी बढ़ रही है।

भूख से जूझ रहे देशों की श्रेणी में भारत पिछड़ कर 121 देशों में 107 वें पायदान पर पहुंच गया है। इन आंकड़ों से मोदी सरकार की देश में तथाकथित विकास के ढिंढोरे की पोल खुल गई है।

केंद्रीय बजट 2023-24 में खाद्य सब्सीडी में भी 90,000 करोड़ रूपये की कटौती की गई है। एक ओर सरकार 81.35 करोड़ लोगों का मुफ्त राशन देने का ढिंढोरा पीट रही है तो दूसरी ओर खाद्य सुरक्षा कानून (FSA) के तहत मिलने वाले सस्ते राशन को बंद किया जा रहा है।

इससे जनता को बाजार से महंगा राशन लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। बढ़ती मंहगाई ने जनता की कमर तोड़ कर रख दी है। रसोई गैस, खाद्य वस्तुओं (आटा, दूध, तेल, दाल व चावल आदि) के दामों में भारी वृद्धि हो रही है।

हाल ही में केन्द्र सरकार द्वारा पेश किए गए बजट में मंहगाई को कम करने के लिए कोई प्रावधान नहीं रखे गए हैं बल्कि उल्टा जनता को खाद्य वस्तुओं में मिल रहे अनुदान को कम किया जा रहा है जिससे मंहगाई में बढ़ोतरी होगी।

मजदूर किसान नेताओं ने कहा कि आज संघर्ष केवल आजीविका और काम करने की स्थिति की तत्काल मांगों के लिए नहीं है बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए है, हमारे समाज के धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक चरित्र को इस सांप्रदायिक और निरंकुश भाजपा-आरएसएस शासन से बचाने के लिए भी है।

उन्होंने देश भर के मजदूरों, किसानों और खेतिहर मजदूरों का आह्वान किया कि वे अपनी जायज मांगों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करें और भाजपा-आरएसएस के नवउदारवादी, साम्प्रदायिक और निरंकुश शासन पर रोक लगाएं।

उन्होंने न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये प्रति माह और सभी श्रमिकों को 10,000 रुपये की पेंशन सुनिश्चित करने; गारंटीकृत खरीद के साथ सभी कृषि उपज के लिए C2+50 प्रतिशत पर MSP की कानूनी गारंटी; चार श्रम संहिताओं और बिजली संशोधन विधेयक 2020 को खत्म करने, शहरी क्षेत्रों में विस्तार के साथ मनरेगा के तहत 600 रुपये प्रति दिन की मजदूरी पर 200 कार्यदिवस प्रदान करने तथा गरीब और मध्यम किसानों व कृषि श्रमिकों को एकमुश्त ऋण माफी देने की मांग की।

उन्होंने सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण को रोकने, एनएमपी व अग्निपथ को खत्म करने, मूल्य वृद्धि को रोकने और पीडीएस को मजबूत करने व उसे सार्वभौमिक बनाने, सभी श्रमिकों के लिए 10,000 रुपये पेंशन और अमीरों पर कर लगाने की मांग उठाई।

--Advertisement--
--Advertisement--

Share post:

Subscribe

--Advertisement--

Popular

More like this
Related

कांगड़ा में जंगली जानवरों का कहर, 31 मेमनों को उतारा मौत के घाट; चरवाहों पर टूटा दुखों का पहाड़

हिमखबर डेस्क  हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के उपमंडल पालमपुर...

सुबह कमरे से नहीं निकला राहुल… जब दरवाजा खोला तो मंजर देख कांप गई रूह

हिमखबर डेस्क  पुलिस थाना भराड़ी के अंतर्गत आने वाली ग्राम...

प्रधानमन्त्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण के अन्तर्गत हिमाचल प्रदेश में धनराशि स्वीकृत

हिमखबर डेस्क  केन्द्रीय ग्रामीण विकास राज्य मन्त्री कमलेश पासवान ने...

पेट्रोल-डीजल पर केंद्र सरकार ने दी बड़ी राहत, 10 रुपए घटी एक्साइज ड्यूटी

हिमखबर डेस्क  अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में...