सीटू ज़िला प्रधान भूपेंद्र व सात रेहड़ी धारकों पर बनाया मुक़दमा ग्यारह साल बाद कोर्ट में ख़ारिज

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नगर निगम मंडी ने वर्ष 2013 में दर्ज़ करवाया था झूठा मुकदमा

मंडी – अजय सूर्या 

मंडी कोर्ट नम्बर एक के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गीतिका कपिला ने रेहड़ी फहड़ी मज़दूरों पर वर्ष जून 2013 में बनाये एक झूठे मुकदमे में नामित सात रेहड़ी मजदूरों और सीटू ज़िला प्रधान भूपेंद्र सिंह को इसमें निर्दोष पाया है उन्हें आज इससे बरी कर दिया।

रेहड़ी फहड़ी यूनियन प्रधान सुरेंद्र कुमार के बोल

रेहड़ी फहड़ी यूनियन के प्रधान सुरेंद्र कुमार ने बताया कि नगर परिषद मंडी ने वर्ष 2013 में सेरी मंच के पास नगर परिषद के लाइसेंस धारक रेहड़ियां लगाने वाले सात रेहड़ी वालों को वहां से जबर्दस्ती खदेड़ने और उनकी सामग्री नष्ट कर दी, जिसका यूनियन द्धारा मौके पर विरोध किया था और विरोधस्वरूप प्रदर्शन किया था लेक़िन तत्कालीन ईओ नगर परिषद ने एक झूठा आरोप लगाते हुए रेहड़ी धारकों पर धारा 353, 506 और 34 व अन्य धाराओं में दर्ज़ कराया था।

लंबी क़ानूनी लड़ाई के बाद आज न्यायलय ने इन सभी रेहड़ीवालों को इसमें निर्दोष पाया और उनके खिलाफ दर्ज़ केस को डिसमिस कर दिया। इस मुक़दमे में सीटू के ज़िला प्रधान भूपेंद्र सिंह के अलावा यूनियन के पूर्व प्रधान राजकुमार राजू, सचिव प्रवीण कुमार, सुरेश कुमार, बलबंत सिंह, नीरज कुमार, सोहन लाल औऱ अमर सिंह को नामित किया गया था।

यूनियन ने अधिवक्ता देश राज शर्मा और ललित शर्मा को अपने केस की पैरवी करने के लिए अधिकृत किया था और अंततः लंबे अरसे बाद आज फ़ैसला मजदूरों के पक्ष में आया है जिसका यूनियन ने स्वगत किया है।

सीटू ज़िला प्रधान भूपेंद्र सिंह के बोल

उधर सीटू ज़िला प्रधान भूपेंद्र सिंह ने कहा कि वर्तमान में भी नगर निगम मंडी शहर में सकोढी पुल और आईटीआई गेट पर से डेढ़ दर्जन रेहड़ियों को गैर कानूनी तौर पर हटाना चाहती है और उसके ख़िलाफ़ यूनियन कई बार प्रदर्शन कर चुकी है और निगम के ख़िलाफ़ हाईकोर्ट और मंडी सत्र न्यायाधीश की अदालत में केस दर्ज करवाना पड़े हैं।

भूपेंद्र सिंह ने कहा कि रेहड़ी धारकों के रोजगार की रक्षा के लिए वर्ष 2014 में स्ट्रीट वैंडर एक्ट बना है लेकिन मंडी और नगर निकायों में उसे सही तरीके से लागू नहीं किया जा रहा है। मंडी नगर निगम के तहत टाऊन वैंडिंग कमेटी की बैठक में जो फ़ैसले पिछले साल हुए थे उन्हें अभी तक भी लागू नहीं किया गया है।

अब अधिकारी और कर्मचारी चुनावों का बहाना बना कर उन्हें लागू नहीं कर रहे हैं। जिसका यूनियन ने कड़ा एतराज जताया है और सभी लंबित मामलों को जल्दी पूरा करने की मांग की है अन्यथा चुनावों के बाद पुनः आंदोलन छेड़ा जायेगा।

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