
कोटला- स्वयंम
किसान निधी की तर्ज के आधार पर अगला चुनाव जीतने के लिए चुनाव से ठीक पहले कर सकते हैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पुरानी पैंशन बहाली की घोषणा। यह बात पूर्व पंचायत समिति सदस्य एवं वर्तमान उपप्रधान पंचायत डोल भटहेड़ साधू राम राणा ने प्रेस वार्ता में कही ।
उन्होंने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल और देश के प्रधानमंत्री मोदी अन्य नेताओं से हटकर एक विशेष प्रकार की अनेकों प्रकार की कला चुनाव जीतने वाली रखते हैं, कि कब किस योजना को चुनाव जीतने के उद्देश्य से जनता को लुभाने के लिए लागू करने की घोषणा की जानी चाहिए।
पहला चुनाव जीतने में प्रधानमंत्री मोदी ने काला धन विदेशों से वापिस लाना, सौ स्मार्ट सिटी बनाना, दो करोड़ युवाओं को रोजगार देना भ्रष्टाचारियों को जेल में बंद करना और अच्छे दिन लाने जैसे अनेकों घोषणाएं करते हुए चुनाव में जीत हासिल कर ली थी, लेकिन इन की गई घोषणाओं को मोदी सरकार सिरे नहीं चढ़ा सकी और अगला चुनाव काफी नजदीक आ गया तो प्रधानमंत्री मोदी ने एकाएक किसान निधी प्रति वर्ष छः हजार देने की घोषणा करते हुए प्रथम किश्त रुपए दो हजार किसानों के खाते ठीक चुनावों से पहले जमा भी करवा दी और यहीं से पिछले समस्त मुद्दों को जनता भूलकर मोदी की सरकार की वापसी करने का मन बना बैठी।
ऐसी ही घोषणा कांग्रेस सरकार ने भी अपने सेवाकाल में चुनाव के आखिरी वक्त पर वन रैंक वन पेंशन को लेकर की थी लेकिन बजट में किए गए प्रावधान के बदले यदि चुनावों से पूर्व किश्त के रूप में कुछ राशि भूतपूर्व सैनिकों के खातों में जमा कर दी जाती तो फायदा मिल सकता था लेकिन कांग्रेस पार्टी इस घोषणा का कोई भी लाभ चुनावों में नहीं ले पाई थी।
अतः अब कुछ मुद्दों पर प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता घटी है और कुछ पर बड़ी भी है। लेकिन इस समस्त जमा घटाव की गुणा को पिछे छोड़ते हुए प्रधानमंत्री मोदी आगामी लोकसभा चुनाव में अपनी जीत को सुनिश्चित करने के लिए चुनाव से ठीक पहले पुरानी पैंशन बहाली की घोषणा करते हुए कर्मचारियों के बहुत बड़े वोट बैंक को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल हो सकते हैं। क्योंकि पुरानी पैंशन बहाली से एकाएक कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा पुरानी पैंशन बहाली से धीरे धीरे पड़ने वाले बोझ को धीरे धीरे मंहगाई की रफ्तार बढ़ा कर भरपाई करने में माननीय मोदी जी सोलह कलाओं से परिपूर्ण माने जाते हैं।
अतः विपक्षी दलों को पुरानी पैंशन बहाली के मुद्दे को हर स्तर पर पुरजोर शोर से उठाना चाहिए ताकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इस घोषणा का कुछ हिस्सा विपक्षी दलों को भी प्राप्त हो सके।
