देहरा – शिव गुलेरिया
देहरा के सनोट में चल रही श्री राम कथा के छठे दिवस पर प्रागपुर के पंडित सुमित शास्त्री ने वर्णन करते हुए कहा कि भगवान शिव ही ऐसे देवता जो अतिशीघ्र प्रसन्न होते है।

भगवान विष्णु को आभूषणों द्वारा, भगवती को स्तुतियों से जबकि प्रभु शिव जल के एक लोटे से प्रसन्न हो जाते हैं। शीघ्र प्रसन्न होने के कारण भगवान शिव का नाम आशुतोष पड़ा ।

इसके बाद शास्त्री ने वर्णन किया कि प्रभु श्रीराम के इष्ट शिव हैं व शिव के इष्ट प्रभु श्री राम हैं। जब समुद्र मंथन हुआ उस समय जो कालकुट विष निकला उस विष को भी भगवान राम के प्रभाव से अपने कंठ में रख लिया जिसके कारण वे नीलकंठ कहलाए। इसके बाद कैकयी द्वारा वरदान मांगना, राम वनागमन व केवट प्रसंग श्रवण करवाया ।

कथा में सुन्दर भजनों जैसे तेरा जीवन सफल हो जायेगा व जीनू राज सवेरे मिलना सी ओ रात दे विच फकीर होया.. ने भक्तों को भाव विभोर कर दिया। कथा में रूपसिंह, शानुक, विनय, मनीक्षा, अंशिका, निधि, अंजना ने भाग लिया ।

