हिम ईरा फूड कार्निवाल में खिंचे चले आ रहे स्थानीय लोगों सहित सैलानी
शिमला, 9 दिसंबर – नितिश पठानियां
वैसे तो ‘रूमाली रोटी’ का चलन कई राज्यों में है। लेकिन, सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र में ‘रूमाली रोटी’ की बात की अलग है। हालांकि, रूमाली रोटी (पोली) खास अवसर पर ही बनती है। लेकिन हिमाचल की राजधानी में ईरा फूड कार्निवल में ये रोटी खास जायके का सबब बनी हुई है।
रोटी की विशेषता इस कारण बढ़ रही है, क्योंकि इसे पहाड़ों की बिच्छूू बूटी की सब्जी के साथ परोसा जा रहा है। आपको बता दें कि पहाड़ों में बिच्छू बूटी एक ऐसा पौधा है, जिसके पत्तों की सब्जी तो बनाई जा सकती है, लेकिन इसे तोड़ना आम व्यक्ति के बस में नहीं होता। क्योंकि, पत्ते को मामूली छूने से ही शरीर में चुभन पैदा हो जाती है। कई मर्तबा सूजन भी आ जाती है। इसे बेहद सावधानी से गांव की महिलाएं चिमटे की मदद से तोड़ती हैं।
खैर, शिमला में देश व विदेश के पर्यटक रूमाली रोटी का आनंद उठा रहे हैं। सिरमौर में सर्दियों के दौरान इस रोटी का खास महत्व रहता है। आटे को गूंथ कर कुछ देर के लिए रख दिया जाता है। इसके बाद हाथों से रोटी को इस स्तर तक फैला दिया जाता है कि उसकी महीन परत बन जाती है। हर देखने वाला ये सोच कर दंग रह जाता है कि आखिर पतली रोटी को बिना टूटे इतना बड़ा आकार कैसे दे दिया जाताा है।
करीब 20 से 30 सैकेंड में रोटी तैयार हो जाती है। बिच्छू बूटी की सब्जी व देसी घी के साथ इसे गर्मागर्म परोसा जाता है। हाथ से उछालते वक्त रोटी बनने का नजारा पहली बार देखने वाले के लिए खास होता है। ऐसा भी माना जाता है कि रूमाली रोटी के बगैर शादी का जश्न अधूरा ही रहता है।

