शाहपुर के विधायक केवल सिंह पठानियां ने दशकों पुराने बीज से उगाए जादुई कद्दू, पूरे हिमाचल में इस कारण हो रही चर्चा, जरूर पढ़ें

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बिना रसायन देशी खाद डालकर तैयार की फसल, खेत में अभी मौजूद है 50 से ज्यादा।

शाहपुर – नितिश पठानियां 

कांगड़ा जिला के शाहपुर हलके से विधायक केवल सिंह पठानियां सियासत के साथ-साथ खेत के भी बड़े खिलाड़ी हैं। किसान परिवार से जुड़े केवल सिंह पठानियां अभी अपने बेहद व्यस्त शेड्यूल से समय निकालकर खेती को समय देते हैं।

मौजूदा समय में केवल सिंह पठानियां ने अपने घर के सामने वाले फार्म में यूं तो कई सब्जियां तैयार की हैं, लेकिन इन सबमें चर्चा का विषय कद्दू की पारंपरिक फसल बनी हुई है।

पठानियां की फार्म के हरे-हरे देसी कद्दू हर ओर चर्चा का केंद्र बने हैं। केवल पठानिया ने बताया कि अभी तक उनके खेतों में करीब 50 पीस निकल चुके हैं। वह अपनी फसल को लोगों को भेंट कर रहे हैं।

उन्होंने अप्रैल माह के अंत में कद्दू का बीज रोपा था। यह पारंपरिक बीज उनके पूर्वजों द्वारा दशकों पहले सहेजा गया है। उन्होंने इसमें गोबर की पक्की खाद का इस्तेमाल किया है।

वह लगातार इसकी देखभाल करते रहे। अभी उनके खेतों में कद्दू का तना लंबा व फसल हरे रंग की है। पठानिया ने बताया कि वह कुछ पीस पकाएंगे ताकि उनका ऑफ सीजन इस्तेमाल किया जा सके।

दो दशक पहले तक कांगड़ा घाटी के किसानों में कद्दू का खूब क्रेज था, उन्होंने अनुभव किया कि अब किसान इस फसल से मुंह मोड़ रहे हैं। यही कारण है कि इस बार उन्होंने गर्मी के सीजन में पारंपरिक कद्दू के लिए ज्यादा स्पेस रखा था।

पारंपरिक कद्दू हृदय रोग, कोलेस्ट्रोल कंट्रोल, डायबिटीज व ब्लड शैल बढ़ाने के लिए रामबाण माना जाता है। विधायक पठानिया अपने खेतों में तैयार कद्दू आने-जाने वालों को भेंट कर रहे हैं।

प्रदेश के कई पोलिटिकल वीवीआईपी ने भी उनसे इस कद्दू की डिमांड की है। बहरहाल केवल सिंह पठानियां ने जिला के अढ़ाई लाख किसानों, एक लाख चौतीस हजार बागबानों व नेताओं के लिए खेती के मोर्चे से बड़ी प्रेरणा दी है।

जानकारी के लिए बता दें कि विधानसभा क्षेत्र शाहपुर के हारचकियां में आज राजस्व, बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी को विधायक केवल सिंह पठानियां ने कद्दू भेंट किया है।

सर्दियों की सब्जियां लगाईं

केवल सिंह पठानियां ने अपने खेतों में सर्दी के मौसम में तैयार होने वाली सब्जियां भी लगा दी हैं। उन्होंने चार कनाल जमीन में धनिया, मटर, मिर्च, शलगम, गोभी, मूली के बीज रोपे हैं।

पठानियां शने कहा कि खेती और बागबानी हिमाचल की रीढ़ है। वह सबसे पहले किसान हैं। उनका जीवन खेती व किसानों की भलाई के लिए खासतौर से समर्पित है।

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