शाहपुर – नितिश पठानियां
जिला कांगड़ा निजी बस ऑपरेटर यूनियन की एक बैठक जिलाध्यक्ष हैप्पी अवस्थी की अध्यक्षता में हुई। जिसमें निजी बस ऑप्रेटरों को बस संचालन में आ रही समस्याओं व सरकार द्वारा एक तरफा थौंपें जा रहे कानूनों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करके प्रदेश सरकार व परिवहन के उच्चधिकारियों को प्रेषित किया गया।
हैप्पी अवस्थी ने कहा कि एचआरटीसी की बसों में महिलाओं को दी जा रही 50 प्रतिशत किराया की छूट की पूर्ण समीक्षा करके या तो इस छूट को वापिस लिया जाए या फिर इस छूट की वजह से निजी बस ऑप्रेटरों को हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए निजी बस ऑप्रेटरों से एसआरटी व टोकन टैक्स न वसूला जाए।
निजी बस ऑपरेटरों को जल्द आरटीए मीटिंग करके बसों की सिटिंग कैपेसिटी की अनुमति प्रदान की जाए क्योंकि सरकार की गलत नितियों व कोरोना के बाद सवारियों की संख्या लगातार कम हुई है। नतीजन निजी बस ऑप्रेटरों अपनी पुरानी व बड़ी बसों के खर्चे भी वाहन नहीं कर पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बस रूट परमिट की प्रक्रिया को पूर्ववत की तरह यथावत रखने व रूट परमिट ट्रांसफर की शक्तियां क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी को दी जाएं। उन्होंने बताया कि परिवहन विभाग के अधिकारी रूट ट्रांसफर नियमों में संशोधन करके, रूट परमिट ट्रांसफर प्रक्रिया को प्रतिबंधित करने जा रहे हैं।
जिस पर यूनियन ने कड़ा एतराज जताया तथा सरकार व अधिकारियों को चेताया कि यदि रूट परमिट ट्रांसफर संबन्धित संशोधन या रोक लगाई गई तो मजबूर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि स्टेज कैरेज बसों की प्रतिस्थापन की अवधि को पहले की तरह 12 वर्ष किया जाए क्योंकि प्रदेश के परिवहन उच्चाधिकारियों द्वारा अकारण ही इस अवधि को 12 वर्ष से घटा कर 8 वर्ष कर दिया गया था।
उन्होंने बताया कि ई-परिवहन व्यवस्था के सॉफ्टवेयर को त्रुटिमुक्त करके निर्वाध व सुचारू किया जाए क्योंकि जो परिवहन विभाग द्वारा ई-परिवहन व्यवस्था लागू की हुई है वो आधी-अधूरी है। सारे परिवहन सम्बन्धित कार्य ऑपरेटरों को परिवहन कार्यालय में जा कर करवाने पड़ते हैं।
उन्होंने मांग की है कि बस का न्यूनतम किराया 12 रुपए किया जाए। उन्होंने मांग की है कि एमवी एक्ट 87 आईसी के तहत एचआरटीसी को रूट पत्र जारी न किया जाए। उन्होंने प्रदेश सरकार को चेताया कि हमारी सभी मांगों को जल्द पूरा किया जाए अन्यथा हमें आंदोलन का रुख अपनाना पड़ेगा जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

