
धर्मशाला – राजीव जसबाल
सिंगापुर के वर्क वीजा के नाम पर टूरिस्ट वीजा देने और पूरे पैसे न लौटाने पर ट्रेवल एजेंट को जिला उपभोक्ता आयोग ने एक लाख रुपये हर्जाना देने का फैसला सुनाया है।
इसके अलावा 25 हजार रुपये पीड़ित को मुआवजे के तौर पर और 7500 रुपये न्यायालय फीस भरने के भी आदेश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता नरवाना योल कैंप धर्मशाला निवासी लाजपथ सिंह ने बताया कि उनके बेटे निशांत पठानिया ने विदेश में नौकरी करने की इच्छा से मार्च, 2019 में जालंधर की एमके ट्रैवल एजेंसी से संपर्क किया।
ट्रैवल कंपनी के संचालक ने कहा कि दो लाख 60 हजार रुपये में सिंगापुर का वर्क वीजा लगा देंगे। उन्होंने एजेंट को दो लाख 60 हजार रुपये दे दिए। जुलाई 2019 के अंतिम सप्ताह में एजेंट ने कहा कि निशांत का आवेदन स्वीकार हो गया है।
निशांत की सिंगापुर की फ्लाइट पांच अगस्त को दिल्ली से जाएगी। दिल्ली पहुंचकर वर्क वीजा और एयर टिकट ले लेना। इस पर निशांत दिल्ली पहुंच गया।
वहां पहुंचकर एजेंट ने कहा कि उसने वर्क वीजा का आवेदन कर दिया है और निशांत को टूरिस्ट वीजा पर भेज देगा। अगर निशांत सिंगापुर जाना चाहता है तो वह जा सकता है।
इसके बाद एजेंट ने अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया। बार-बार कहने के बाद एजेंट ने उन्हें 30 हजार रुपये लौटाए। इसके बाद कुछ कानूनी कार्रवाई पर एक लाख 30 हजार रुपये लौटाए और शेष पैसे नहीं दिए।
जिला उपभोक्ता न्यायालय में आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य नारायण ठाकुर व सदस्य आरती सूद ने एक लाख रुपये हर्जाना और मुआवजे का पैसा लौटाने का फैसला सुनाया।
