वन रैंक वन पैंशन को लेकर कोटला में गरजे पूर्व सैनिक

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कोटला – स्वयम

हिमाचल प्रदेश पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ कोटला इकाई के पूर्व सैनिकों, वीर नारियों एवं वीरांगनाओं ने सोमवार को वन रैंक वन पैंशन में हुई विसंगतियों को दूर करने के लिए व अन्य मांगों को पूरा करने के लिए महामहिम राष्ट्रपति , माननीय प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री के नाम नायब तहसीलदार कोटला के माध्यम से ज्ञापन सौंपा।

इससे पहले भूतपूर्व सैनिकों ने सामुदायिक भवन कोटला में जनसभा की, जिसमें अपनी प्रमुख मांगों के बारे में विचार विमर्श किया। उसके बाद कोटला बाजार से होते हुए नायब तहसीलदार कार्यलय कोटला तक हल्ला बोल रैली निकाली।

इस मौके पर पदाधिकारियों ने बताया कि मांगों को लेकर जंतर मंतर में 20 फरवरी से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन जारी है। समर्थन देने और केंद्र सरकार को जवानों की न्याय देने संबंधी मांग पत्र कई बार सौंपा गया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसके बाद जवानों को मजबूरी में विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा।

उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों की यूनियन लंबे समय से संर्घषरत है। देश आजाद होने से लेकर अभी तक जवानों के साथ लगातार भेदभाव और अन्याय होता आ रहा है, जबकि जवान अपनी जान की परवाह न करते हुए देश की रक्षा करते हैं।

23 दिसम्बर, 2022 को वन रैंक वन पैशन को लागू करने के बारे में जानकारी दी गई थी जिसमें बताया गया था कि 1 जुलाई, 2014 से पूर्व प्री मैच्योर रिटायरमैंट आए जवानों को वन रैंक वन पैंशन का लाभ नहीं दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जवान कभी प्री मैच्योर रिटायरमैंट नहीं होते हैं क्योंकि उनका एग्रीमैंट 15 प्लस 2 साल का होता है जबकि उच्च अधिकारियों का एग्रीमैंट 58 साल का होता है। रैली का मुख्य लक्ष्य सैनिकों की पैंशन में हो रहे भेदभाव को सरकार तक पहुंचाना है।

वन रैंक वन पैंशन पर सिर्फ जवानों का हक बनता है, इसका पूरा लाभ जवानों को मिलना चाहिए। मिल्ट्री सर्विस पे, डिसएबिलिटी पैंशन, अलाऊंस सभी रैंक का एक समान किया जाए।

उन्होंने कहा कि वह किसी पार्टी से कोई संबध नहीं रखते हैं लेकिन देश आजाद होने के बाद आज भी किसी भी राजनीतिक पार्टी ने सैनिकों के लिए कुछ नहीं किया है। सेना के पूर्व अधिकारी जवानों की भीड़ दिखाकर केंद्र सरकार से सिर्फ अधिकारी वर्ग के लिए मांगें मनवा जाते हैं। वन रैंक वन पैंशन में जवानों के साथ धोखा किया गया है।

उन्होंने कहा कि आजाद भारत में गुलामों वाले कानून बदले जाएं। देश में जहां 1957 वाला कानून लागू है, वहीं सेना में अभी भी 1924 का ब्रिटिश रूल लागू है, जिसकी वजह से जवानों का शोषण होता है और जवान आत्महत्या तक करने पर मजबूर हो जाता है।

पूर्व सैनिकों ने कहा कि 2014 में पूर्व सैनिकों ने बड़ी उम्मीद के साथ मोदी सरकार को वोट दिया था। मोदी ने कहा था कि जवानों के अच्छे दिन आने वाले हैं। लेकिन हुआ इसके उलट। जिस सेना के जवान ने खामियां बताईं उसे ही सेना से बाहर कर दिया गया।

ये रहे उपस्थित

इस अवसर पर कै चुन्नी लाल, कै प्रताप सिंह चौहान, लांस नायक जेपी शर्मा, लै कुलदीप जसवाल, लाल सिंह राणा, कै मान सिंह राणा, कै रोशन लाल, सरन दास, कै बलदेव सिंह, साहब सिंह, कै रुमेल सिंह, कश्मीर सिंह, राजेन्द्र कौशल, अरूण थापा, टेकचंद, बीआर राणा, प्रेम चंद सहित भारी संख्या में वीर नारियां मौजूद रहे।

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