हिमखबर डेस्क
ईरान के रिवोल्यूशनरी गाड्र्स ने शुक्रवार तडक़े अमरीकी-इजरायली हवाई हमलों में अपने प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी के मारे जाने की पुष्टि की है। यह हमला उनके उस बयान के कुछ ही मिनटों बाद हुआ, जिसमें उन्होंने चल रहे युद्ध के बावजूद मिसाइल उत्पादन जारी रहने की बात कही थी।
गत 28 फरवरी को सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने के बाद से ईरान के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ चल रहे अभियानों की श्रृंखला में यह एक और बड़ी घटना है। इससे पहले इजरायल ने ईरान के खुफिया मामलों के मंत्री इस्माइल खतीब के मारे जाने की जानकारी दी थी। वह 2022-2023 के महसा अमीनी विरोध प्रदर्शनों को दबाने और विदेशों में इजरायलियों और अमेरिकियों के खिलाफ ऑपरेशनों में शामिल थे।
इस सप्ताह ईरानी सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी और बासिज अर्धसैनिक बल के प्रमुख गुलामरेजा सुलेमानी भी इजरायली हवाई हमलों में मारे गए हैं। ईरान ने इन हमलों को कायरतापूर्ण बताते हुए निंदा की है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमरीकी और इजरायली यह समझने में असमर्थ हैं कि ईरान के पास स्थापित राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक संस्थानों के साथ एक मजबूत ढांचा है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के शक्तिशाली सचिव अली लारीजानी के मारे जाने के बावजूद ईरानी नेतृत्व को कोई घातक झटका नहीं लगेगा। श्री अराघची के अनुसार ईरान का शासन ढांचा व्यक्तियों के नुकसान के बावजूद लचीला बना हुआ है और यह एक बहुत ठोस प्रणाली है।
कौन थे मोहम्मद नैनी?
ब्रिगेडियर जनरल अली मोहम्मद नैनी ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्र्स के प्रवक्ता और जनसंपर्क के उप-प्रमुख थे। उन्हें जुलाई 2024 में आईआरजीसी के कमांडर-इन-चीफ हुसैन सलामी ने इस पद पर नियुक्त किया गया था। वर्ष 1957 में जन्मे नैनी ईरान-इराक युद्ध के अनुभवी सैनिक थे। इस जंग के दौरान वह जख्मी भी हुए थे।
नैनी के पास उनके पास सेकेंड ब्रिगेडियर जनरल का पद था। वह अकसर आईआरजीसी की ओर से बयान जारी करते थे, जिनमें ईरान की सैन्य तत्परता, मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं के बारे में चेतावनियां होती थीं।

