रेहड़ी वालों को दो साल से नहीं मिले लाईसेंस और पहचान पत्र – सुरेंद्र

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आज हो रही टाउन वैंडिंग कमेटी में उठायेंगे मुद्दा

मंडी – अजय सूर्या

संसद द्धारा वर्ष 2014 में रेहड़ी वालों के रोज़गार की रक्षा के लिए क़ानून बनाया है।जिसके चलते सभी नगर निकायों में रेहड़ी फड़ी लगाने के अधिकार को मान्यता प्रदान की है।

जिसके चलते मंडी की पूर्व नगर परिषद और अब बनी नगर निगम में भी टाउन वैंडिंग कमेटी गठित की गई है।लेकिन बड़ी हैरानी की बात है कि कमिश्नर की अध्यक्षता में गठित 21 सदस्यीय टाउन वैंडिंग कमेटी की दो बैठकें तो हुई हैं लेकिन बैठक कार्यवाही की प्रतियां अभी तक भी सदस्यों को उपलब्ध नहीं करवाई गई है।

ये बात यूनियन के प्रधान सुरेंद्र कुमार शीलू ने बताई।उन्होंने बताया कि आज 20 अप्रैल को फ़िर से मीटिंग बुलाई गई है जिसके लिए यूनियन ने ग्यारह सूत्रीय मांगों पर चर्चा करने के लिए माँगपत्र तैयार किया है।

जिसमें सर्वप्रथान बैठक की कार्यवाही उपलब्ध कराने की मांग की गई है।इसके अलावा निगम पिछले दो साल से लाइसेंस और पहचान पत्र भी जारी नहीं कर पाई है और सबसे हैरानी तो यह है कि गत वर्ष 20 जुलाई 2022 को शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज की अध्यक्षता में 40 रहड़ी‌ धारकों को बिना किसी हस्ताक्षर के लाइसेंस जारी किए गए थे जिन पर अभी तक भी हस्ताक्षर नहीं किये गए हैं।

निगम ने वैंडिंग और नो वैंडिंग क्षेत्रों के बारे में तथा रहदीधारकों का जो सर्वेक्षण किया है उसकी भी अधुसूचना जारी नहीं की है।जिसके चलते निगम के कर्मचारी मनमर्ज़ी के आधार पर रहदीधारकों को परेशान करते रहते हैं जिस पर रोक लगनी चाहिए।

वैंडिंग क्षेत्रों को प्रदर्शित करने के लिए यलो लाईन लगाने बारे कई बार फ़ैसला लेक़िन अभी तक ये काम भी नहीं हुआ है।पिछले दस वर्षों में शहर में कई नई रेहड़ियां भी लगी है जिन्हें स्थान और पहचान पत्र जारी नहीं हुए हैं।

इसके अलावा गुजराती समुदाय द्धारा लगाई जाने वाली सन्डे मार्किट, कोविड काल की तहबाजारी मुआफ़ करने, आजीविका मिशन के तहत बीमा करने, रहदीधारकों से कूड़ा दिन के बजाये शाम को एकत्रित करने तथा सदर के विधायक अनिल शर्मा द्वारा टाउन वैंडिंग कमेटी के फैसलों को बदलने में किये जा रहे अनावयशक और गैर कानूनी हस्तक्षेप को रोकने का मुद्दा भी आज की मीटिंग में उठाया जाएगा।

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