दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सरकारी बंगले की सजो सजावट के अथाह खर्च के समानान्तर मिडिया एवं जांच एजेंसियां उन नेताओं की जांच केलिए आवाज उठाएं जिन्होंने सत्ता में रहकर करोड़ों रुपए की संपत्तियां अर्जित की हैं। साधू राम राणा
दुराना – अमित शर्मा
पूर्व पंचायत समिति सदस्य एवं वर्तमान उपप्रधान पंचायत डोल भटहेड़ साधू राम राणा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सरकारी बंगले की सजो सजावट पर हुए खर्च को लेकर मिडिया एवं जांच एजेंसियां द्वारा जो सवाल खड़े किए जा रहे हैं वह तो एक सरकार संपत्ति का हिस्सा है और उस में अरविंद केजरीवाल एक मुख्यमंत्री की हैसियत से रह रहे हैं जोकि मुख्यमंत्री ना होने पर इस में नहीं रह सकते हैं।
कोई दूसरा मुख्यमंत्री इस सरकारी आवास में रहने लगेगा और ऐसी बहुत सी सरकारी संपत्तियां एवं भवन हैं जो कुछ समय तक इस्तेमाल करने उपरांत या तो असुरक्षित घोषित कर दिए जाते हैं या फिर उपयोग में न लाकर भी उनके रखरखाव पर हर साल लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं।
जैसे कि उदाहरण के तौर पर तहसील ज्वाली में वन विभाग का कुठहेड़ में बना परीक्षण केंद्र वर्षों से ख़ाली होने पर भी हर वर्ष रखरखाव के एवज में इस पर लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसके इलावा अन्य अनेकों सरकारी भवन पुल निर्माणाधीन समय में ही धाराशाई हो रहे हैं लेकिन क्या कभी मीडिया एवं जांच एजेंसियों का ध्यान इन मसलों सहित उन विधायकों सांसदों मंत्रियों मुख्यमंत्रियों एवं प्रधानमंत्रियों की ओर भी गया, जिन्होंने ने सत्ता में रहकर करोड़ों रुपए की संपत्तियां अर्जित करने का कीर्तिमान स्थापित किया है और आगे भी कर रहे हैं।
आज स्वर्गीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री एवं स्वर्गीय राष्ट्रपति अब्दुल कलाम सहित चंद नेताओं को छोड़कर अधिकतर नेताओं में कोई ऐसा नेता देश में नहीं है, जिसने करोड़ों रुपए की संपत्तियां अल्प समय में अर्जित न की हों और अनेकों फ्लेट प्लाट अपने और अपने परिवार के नाम पर नाम ना खरीदें हों ।
जबकि अरविंद केजरीवाल के मुद्दे से कहीं ज्यादा ऐसे मुद्दे काफी गंभीर होने पर भी कोई जांच एजेंसी या मीडिया इस पर बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। जो माननीय समाजसेवा के नाम पर राजनीति में आकर अथाह वेतन-भत्तों एवं पैंशन योजना का लाभ लेकर भी आयकर तक सरकार खजाने से अदा करते हैं और अल्प अवधि में सत्ता के सिंहासन पर विराजमान होकर करोड़ों रुपए की संपत्तियां अर्जित करते हैं।
उनकी हर जगह जय जय कार होती है और जबकि सरकारी संपत्ति का सुधारीकरण करने पर मीडिया एवं जांच एजेंसियां एक साथ राजनीति भावना के आधार पर खड़े होकर जांच की आवाज बुलंद करने में जुट जाते हैं। जबकि केजरीवाल के सरकारी बंगले की सजो सजावट से कहीं महंगी दरों का समान एकबार रहे विधायकों एवं सांसदों के निजी घरों में लगा हुआ देखा जा सकता है जोकि मीडिया एवं जांच एजेंसियों केलिए कभी भी आजतक जांच का मुद्दा या विषय नहीं बन पाया है।

