भाई की मौत के सदमे ने ‘कोलर’ की बेटी को कनाडा में बनाया नर्सिंग ऑफिसर, ऐसे पाया मुकाम

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देश ही नहीं, वैश्विक स्तर पर भी “सिरमौर” की बेटियां छू रही फलक, रजिस्टर्ड नर्स की परीक्षा में सफलता पाकर पाई मंजिल

नाहन, 29 जुलाई – नरेश कुमार राधे

एक 15 साल की बच्ची 2009 में भाई की सड़क हादसे में मौत हो गई, परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। चंद बरस बाद पिता ने भी संसार त्याग दिया। किशोरावस्था में  “गरिमा बरोत” को इस बात का इल्म हो गया, परिवार पर क्या गुजर रही है।

पांच मिनट छोटा जुड़वां भाई “गौरव” ने बहन के उस निर्णय में हामी भरी, जिसमे गरिमा ने मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने का फैसला लिया था। पांच साल के अंतराल में भाई व पिता को खो देने वाली गरिमा ये समझ चुकी थी कि मेडिकल प्रोफेशन ही मानवता की सेवा का एक सही रास्ता है।

सोच की बदौलत 29 वर्षीय “गरिमा” ने वैश्विक स्तर पर देश व प्रदेश गौरवान्वित किया है। कोलर में जमा दो तक की पढ़ाई करने वाली “गरिमा” ने कनाडा में रजिस्टर्ड नर्स की परीक्षा को उत्तीर्ण किया है। वैश्विक स्तर पर एनसीएलएक्स-आरएन की परीक्षा में सफलता मामूली बात नहीं है।

इसके बाद वो यूएसए, यूके, न्यूजीलैंड, कनाडा के अलावा यूरोप के अन्य देशों में बतौर रजिस्टर्ड नर्स सेवाएं प्रदान कर सकती है। बता दे कि ये परीक्षा रेगुलेटरी बॉडी की नेशनल काउंसिल ऑफ स्टेट बोर्ड ऑफ नर्सिंग द्वारा कंडक्ट किया जाता है।

फ़िलहाल,गरिमा ने कनाडा में ही सेवा प्रदान करने के फैसला लिया है। गरिमा ने कनाडा से एमबीएम न्यूज़ नेटवर्क से बातचीत में कहा कि जमा दो की पढ़ाई के दौरान ही यह तय कर लिया था कि वह स्वास्थ्य क्षेत्र में ही सेवाएं देगी, क्योंकि असल मायनों में यह मानवता की सेवा है।

उल्लेखनीय है कि शिवालिक इंस्टीट्यूट ऑफ़ नर्सिंग संजौली (शिमला) में बीएससी (नर्सिंग) की पढ़ाई करने के बाद गरिमा ने ढाई साल तक गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में भी सेवाएं दी। इसके बाद वह पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) के लिए कनाडा के नियाग्रा कॉलेज में दाखिले का निर्णय लिया था।

कोलर में सेना से रिटायर्ड कैप्टन दिवंगत भुरू राम व गुलाब देवी के घर जन्मी “गरिमा” का ये भी कहना है कि जरूरत पड़ने पर वो मातृभूमि में लौटने से भी संकोच नहीं करेंगी।

आसान नहीं था ये

करीब ढाई साल की नौकरी में “गरिमा” ने आगे की पढ़ाई के लिए कुछ बचत कर ली थी, लेकिन परिवार के लिए बेटी को सात समुंदर पर कनाडा भेजने का निर्णय भी मुश्किल घड़ी भरा था। अब जब बेटी ने विदेशी धरती पर प्रतिभा का डंका बजाया है तो परिवार के हरेक सदस्य का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है।

होनहार बेटी “गरिमा” पर मां भद्रकाली की असीम कृपा बनी हुई है। पांच मिनट छोटे भाई गौरव बरोत ने कहा कि पूरे परिवार ने हर कदम पर गरिमा को प्रोत्साहित किया। फ़िलहाल पुख्ता तौर पर तो नहीं कहा जा सकता है लेकिन हो सकता है कि ये परीक्षा में सफल होने वाली “गरिमा” सिरमौर की पहली युवती हो।

ये मिल सकता है पैकेज

उम्मीद है कि गरिमा को शुरुआत में सालाना 50 लाख का पैकेज मिल सकता है, लेकिन गरिमा कहती है कि पैकेज मायने नहीं रखता है क्योंकि असल मायनों में मेडिकल प्रोफेशन की कसौटी पर खरा उतरना है। उन्होंने माना कि पश्चिमी देशों में मेडिकल फिल्ड को सबसे बड़ा नोबल प्रोफेशन माना जाता है।

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