बासा व लूनसू पुल न बनने से लोगों को आवाजाही करने में हो रही दिक्‍कत, चुनाव से पहले पुल बनाने की उठाई मांग

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नगरोटा सूरियां – शिव गुलेरिया

विकास खंड नगरोटा सूरियां के लूनसू और धनगढ़ मंदराटा में पुल न होने के कारण ग्रामीण जनता के लिए दो महीने बरसात में आवाजाही करना मुश्किल हो जाता है।

काफी समय से गांव लूनसू का संपर्क मार्ग कच्चा है, जबकि अब बरसात के मौसम के चलते वर्तमान में यहां के लोगों के लिए आवाजाही की एक मात्र रेल सुविधा भी समय पर नहीं मिलेगी। लोगों को यह आफत भी सामने नजर आ रही है।

बरसात के मौसम की बजह से रेल प्रशासन ने लोगों की सुरक्षा की दृष्टि से गुलेर से कोपरलाहड़ के बीच असुरक्षित स्थानो पर रात्रि रेल यातायात बंद कर दी है, जिससे उक्त गांव के लोगो को आने जाने में असुविधा उत्पन हो गई है।

फिर भी विभाग का मानना है कि यह उचित निर्णय लोगों के हित में लिया गया है, पर लोग सवाल करने लगे है कि इस बरसात की बात नहीं है ये ल्हासे गिरने की साथ लगते स्थानों के ट्रेक पर पिछले लंबे अरसे से चली आ रही हैं।

रेलवे विभाग लंबे समय से जानते हुए भी सब जानते हुए भी इस समस्या का हल नहीं कर पाया। साथ लगते गांवों के लोगों रमेश कुमार, छंगन, कुलदीप सिंह, सुरेश, दिनेश, जोगिंद्र, मनोहर लाल, सुभाष चंद, ज्ञान चंद, सरदारी लाल, बनी, अजय, सुरेंद्र व राकेश ने मांग की है कि अगर जन प्रतिनिधि व प्रशासन दिलचस्पी ले तो सुधार क्यों नहीं हो सकता।

इस ओर गौर किया जाना जरूरी बनता है। जिससे हर साल बरसात में जो समस्या बनती आ रही है का समाधान भी करे और रेल सुविधा भी संपूर्ण रूप से बहाल रहे। वहीं जो गांव ऐसे जुड़ेंगे उनको आने जाने की सुविधा मिल सके।

उक्त गंभीर आवागमन की कठिनाई के चलते लूनसू की जनता ने अस्सी के दशक में जब उस समय सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री जब देहरा आए थे। एक कार्यक्रम में तो जनता ने अपनी।

बासा लूनसु पुल ना बनने की गंभीर समस्या उनके समक्ष रखी थी, तो उन्होंने आश्वाशन दिया था कि समय आने पर लूनसु को बासा के साथ बनेर खडड़ पर अस्थायी पुल डलवा लोगों को आने जाने के लिए मुहैया करवाया जाएगा। मगर करीब साढ़े तीन दशक के बाद भी कुछ नहीं हुआ।

वर्तमान सरकार और हल्का विधायक, लोकसभा सांसद हमीरपुर दिलचस्पी ले तो चुनावों से पहले ही सही यहा की जनता धनगढ़ , मंद्राटा, ठंबा, ललूरी, चपरेनी व धार इत्यादि गांवों के लोगों को सहूलियत हो सकती है।

इनमें से दो तीन गांवों के लिए परिवहन सुविधा भी ना के बराबर है। धनगढ़ के लिए केवल एक बस ही शाम सवेरे गुलेर से वाया मसरूर चलती है जो कि नाकाफी है। धार के लिए यह सुविधा भी नहीं है।

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