पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले में दो अफसर निशाने पर

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ब्यूरो – रिपोर्ट

हिमाचल प्रदेश पुलिस की कांस्टेबल भर्ती की लिखित परीक्षा के पेपर लीक मामले में कई पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में हैं। सीक्रेसी लीक होने पर दो पर गाज गिर सकती है।

प्रारंभिक जांच में कुछ ऐसे सुराग मिले हैं। जब तक ये साक्ष्य में नहीं बदलेंगे, तब तक स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (एसआइटी) इन अधिकारियों पर हाथ नहीं डालेगी। अब तक सामने आए साक्ष्यों की कडिय़ां जोड़ी जा रही हैं।

पुलिस कांस्टेबल के 1334 पदों के लिए तीन जुलाई को आयोजित दूसरी लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की सत्यापन प्रक्रिया 18 जुलाई से होगी। इसमें अभ्यर्थियों का सामान्य ज्ञान परखा जाएगा।

पहले कांगड़ा में दस्तावेजों की जांच-पड़ताल के दौरान ही कई अभ्यर्थियों के सामान्य ज्ञान पर पुलिस अधिकारियों को शक हुआ था। उनका शक सही निकला।

बाद में पता चला कि अभ्यर्थियों ने लाखों रुपये देकर पेपर खरीदा था। इसके लिए परीक्षा से दो दिन पहले हिमाचल, हरियाणा व चंडीगढ़ के आसपास गिरोह के सदस्यों ने उत्तर रटवाए थे।

मंडी में तो एक हाल में लीक पेपर की कक्षाएं तक लगाई गई थीं। वहां रात के अंधेरे में परीक्षा के सवाल और उनके जवाब रटवाए जाते थे।

अधिकारियों का स्टाफ भी जांच के दायरे में

पुलिस भर्ती से जुड़े अधिकारियों के अतिरिक्त इनका स्टाफ भी जांच के दायरे में है। स्टाफ को भी पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा। जैसे ही इस दिशा में कोई तथ्य आएंगे, उनके आधार पर जांच की रणनीति भी बदलेगी।

कितने हुए पास

दूसरी लिखित परीक्षा में 69405 अभ्यर्थी बैठे थे। इनमें से 12336 अभ्यर्थियों ने परीक्षा पास की थी। इनमें से 9629 पुरुष और 2707 महिला अभ्यर्थी शामिल हैं। जैसे ही दस्तोवजों के सत्यापन की प्रक्रिया आरंभ होगी, अंतिम चयन सूची जारी की जाएगी। सितंबर से ट्रेङ्क्षनग आरंभ होगी।

क्या है मामला

हिमाचल प्रदेश में कांस्टेबल के 1334 पदों के लिए भर्ती की लिखित परीक्षा 27 मार्च को हुई थी। कांगड़ा जिले में पुलिस भर्ती का प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आने के बाद सरकार ने छह मई को परीक्षा रद कर दी।

इस संबंध में कांगड़ा के गगल, शिमला के सीआइडी थाने व सोलन के अर्की में मामले दर्ज हुए थे। तीनों मामलों में कुल 181 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।

जांच में पता चला कि पेपर लीक मामले के तार 10 से अधिक राज्यों के गिरोह से जुड़े हैं। सरकार ने मामले की जांच सीबीआइ से करवाने की सिफारिश की थी। अब तक सीबीआइ ने मामला अपने हाथ में नहीं लिया है।

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