पिता-पुत्री के हौसले को सलाम…मलबे में दबने के बाद भी नहीं हारी हिम्मत, 3 को किया रेस्क्यू

--Advertisement--

मंडी – अजय सूर्या

30 जून की रात को आई आपदा में कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने अपने अदम्य साहस का परिचय देकर इसका डटकर मुकाबला भी किया और दूसरों की जानें भी बचाई। ऐसी ही कहानी सराज विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले शरण गांव के पिता और पुत्री की है। भरत राज और उनकी बेटी तुनेजा ठाकुर ने इस आपदा में अपने अदम्य साहस का परिचय दिया।

उन्होंने बताया कि 30 जून की रात को जब घर के पीछे वाली साइड से भारी मलबा आने लगा तो आस-पास के घरों के करीब 20 लोग इनके घर पर आकर इकट्ठा हो गए। लेकिन जब मलबा और बढ़ गया और घर में पानी घुसने लग गया तो सभी अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे। ऐसे में तुनेजा, उसकी छोटी बहन टविंकल, माता मंशा देवी, दादा हरि सिंह और एक अन्य महिला राधू देवी मलबे में फंस गए। भरत राज ने ट्विंकल, मंशा देवी, हरि सिंह और राधू देवी को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाल दिया, लेकिन तुनेजा को नहीं निकाल सके। बेटी की चीखो पुकार सुनकर मन विचलित हो उठा, लेकिन हिम्मत नहीं हारी।

तुनेजा ने बताया कि वो मलबे के साथ थोड़ी आगे तक बह गई और छाती तक डूब गई थी। एक लकड़ी के टुकड़े को पकड़कर खुद को बहने से बचाया। उसके बाद खुद को जैसे-तैसे इससे बाहर निकाला और सुरक्षित स्थान की तरफ भागी। सुबह जब परिवार के लोगों के साथ मिलना हुआ तो सभी की जान में जान आई। उसके बाद सभी बगस्याड स्कूल पहुंचे और अभी तक वहीं पर ही रह रहे हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर जब शरण गांव पहुंचे और उन्हें इस बेटी और इसके पिता के साहस की कहानी का पता चला तो उन्होंने जमकर इसके लिए दोनों की पीठ थपथापाई। वहीं, सराज दौरे के दौरान सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी दोनों को शाबाशी दी। अभी यह परिवार बगस्याड स्कूल के अस्थायी शिविर में रह रहा है।

तुनेजा और भरत राज ने बताया कि आपदा ने उनका सबकुछ छीन लिया है। तुनेजा बीएसई की पढ़ाई कर रही है। तुनेजा ने सरकार से मांग उठाई है कि अब उनके पास कमाई का कोई साधन नहीं बचा है और उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। ऐसे में सरकार इनकी पढ़ाई के बारे में सोचे और उसका खर्च उठाए। वहीं, भरत राज ने सरकार से प्रभावितों के स्थायी पुर्नवास की तरफ प्रभावी कार्रवाई की गुहार लगाई है।

बता दें कि बगस्याड़ क्षेत्र के तीन पटवार वृतों के तहत 27 घर, 3 दुकानें और 28 गौशालाएं पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इसके अलावा 15 घर, 3 दुकानें और 2 गौशालाओं को आंशिक नुकसान पहुंचा है। राहत की बात यह है कि यहां किसी की जान नहीं गई है।

--Advertisement--
--Advertisement--

Share post:

Subscribe

--Advertisement--

Popular

More like this
Related

13 साल से जीवन और मृत्यु के बीच जूझ रहे हरीश राणा ने ली अंतिम सांस, परिवार ने अंगदान की अनुमति दी

हिमखबर डेस्क  गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन के हरीश की जिंदगी...

आईटीआई वालों के लिए रेलवे में काम करने का शानदार मौका

आईटीआई वालों के लिए रेलवे में काम करने का...

UPSC ने एमबीबीएस के लिए निकाली 1358 पदों पर भर्ती, योग्य उम्मीदवार 31 मार्च तक करवा सकते हैं रजिस्ट्रेशन

हिमखबर डेस्क  यूपीएससी ने कंबाइंड मेडिकल सर्विस (सीएमएस) परीक्षा 2026...

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड में नौकरी, योग्य उम्मीदवारों का इतने पदों पर किया जाएगा चयन

हिमखबर डेस्क  सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन...