पंचायत सचिव भर्ती लटकी; एचपीयू ने खींचे हाथ, टाइपिंग टेस्ट और मूल्यांकन से इनकार

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शिमला – जसपाल ठाकुर

पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास विभाग का एक गलत फैसला अब राज्य सरकार पर भारी पड़ गया है। विभाग ने जल्दी भर्ती करने के तर्क पर हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय को पंचायत सचिवों के 239 पद भरने की भर्ती सौंप दी थी।

यह प्रक्रिया पिछले साल शुरू हुई थी और 22 अक्तूबर, 2021 को एचपीयू ने यह पेपर करवाया, लेकिन अब टाइपिंग टेस्ट और 15 अंकों का मूल्यांकन करने से विश्वविद्यालय ने इनकार कर दिया है। इस कारण भर्ती फंस गई है और विभाग को और कोई दूसरा रास्ता नहीं मिल रहा है।

दूसरी ओर पिछले साल गठित नई पंचायतों को इस कारण अब तक सरकार पंचायत सेक्रेटरी उपलब्ध नहीं करवा पाई है। पंचायत सचिव के 239 पदों के लिए 22 अक्तूबर, 2021 को 25 हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी।

उस वक्त भी सबसे बड़ा विवाद यह खड़ा हो गया था, क्योंकि एचपीयू ने परीक्षा शुल्क ही 1200 रुपए लिया था। यह एचएएस की परीक्षा के शुल्क से भी तीन गुना ज्यादा था। तब पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर का आग्रह पत्र प्रदेश विश्वविद्यालय ने नहीं माना था।

इसके बाद पांच अप्रैल को विश्वविद्यालय ने परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया, लेकिन इसके बाद न ही मेरिट जारी हुई और न ही टाइपिंग टेस्ट का शेड्यूल आया। इस परीक्षा के बाद अब एचपीयू ने परीक्षा में बैठे 25000 से ज्यादा अभ्यर्थियों का रिकार्ड पंचायती राज विभाग को सौंप दिया है और साथ ही कहा है कि टाइपिंग टेस्ट और मूल्यांकन वह नहीं करेंगे, क्योंकि ऐसी कोई बात भर्ती एचपीयू को देती बार नहीं हुई थी।

अब पंचायती राज विभाग बीच में फंस गया है। विभाग ने टाइपिंग टेस्ट और इवेल्युएशन के लिए कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर से आग्रह किया था, लेकिन उन्होंने भी इस से इनकार कर दिया है। आयोग का तर्क है कि वह सिर्फ कंप्लीट भर्ती करते हैं। आधी भर्ती प्रक्रिया को लेने के लिए उनके पास कोई व्यवस्था नहीं है।

इधर, हजारों अभ्यर्थी इस भर्ती के रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं। गौरतलब है कि राज्य में इस तरह की भर्ती के लिए कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर एक डेजिग्नेटिड संस्था है, लेकिन विभाग ने यह भर्ती आयोग को न देकर एचपीयू को दी थी। यही फैसला अब गले में फंस गया है।

सरकार से मांगी है विकल्प पर अनुमति

पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास विभाग के निदेशक ऋग्वेद मिलिंद ठाकुर ने पुष्टि की है कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने यह भर्ती बीच में छोड़ दी है और अब हम कुछ विकल्पों पर काम कर रहे हैं। अभी स्थिति यह है कि भर्ती प्रक्रिया को रद्द भी नहीं किया जा सकता। इस बारे में राज्य सरकार से अनुमति फाइल पर ली जाएगी और उसके बाद अगले कदम पर फैसला लेंगे।

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