हिमखबर डेस्क
प्रदेश सरकार ने आपत्तियों पर विचार करने के बाद हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (निर्वाचन) नियम, 1994 में और संशोधन करने के लिए नियम तय कर दिए हैं।
संशोधित नियमों के तहत 95 प्रतिशत पंचायतों का आरक्षण नियमों के तहत होगा, जबकि 5 प्रतिशत पंचायतों में डीसी भौगोलिक और अन्य विशिष्ट परिस्थितियों को ध्यान में रखते आरक्षण रोस्टर बदल सकेंगे।
पंचायतीराज विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार अब डीसी विशेष परिस्थितियों में पंचायतों के रोस्टर में सीमित बदलाव कर सकेंगे। पंचायतीराज विभाग के सचिव की ओर से इसे लेकर अधिसूचना जारी की गई है।
सरकार ने हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (चुनाव) संशोधन नियम, 2026 लागू कर दिए हैं। इसके तहत ग्राम पंचायतों के सदस्यों, प्रधानों और पंचायत समिति अध्यक्षों के रोस्टर में अधिकतम पांच प्रतिशत तक परिवर्तन करने का प्रावधान किया गया है।
यह बदलाव भौगोलिक और अन्य विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किया जा सकेगा। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि यह संशोधन नियमों में पूर्व में प्राप्त आपत्तियों और सुझावों पर विचार करने के बाद किया गया है।
सरकार का कहना है कि कई क्षेत्रों में भौगोलिक विषमताओं के कारण रोस्टर लागू करने में दिक्कतें आ रही थीं, जिसे दूर करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
बता दें, पंचायतों और नगर निकायों के पूर्व पदाधिकारियों का कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका है। इस वजह से पंचायत और निकायों में सरकार ने प्रशासक बिठा रखे हैं, क्योंकि राज्य में चुनाव समय पर नहीं करवाए जा सके।
सोलन, मंडी और पालमपुर एमसी में 2011 की जनगणना पर आरक्षण
सोलन, मंडी और पालमपुर नगर निगमों में मेयर व डिप्टी मेयर पदों के आरक्षण का निर्धारण 2011 की जनगणना के आधार पर किया गया है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार तीनों नगर निगमों में अनुसूचित जनजाति की आबादी अपेक्षाकृत कम पाई गई, जिसके चलते मेयर पद को अनारक्षित (सामान्य वर्ग) रखने का निर्णय लिया गया।
सोलन में कुल 47,418 आबादी में एसटी की संख्या मात्र 556 है, जबकि मंडी में 41,375 में 288 और पालमपुर में 40,385 में 3,428 एसटी आबादी दर्ज की गई है।
विभागीय मानकों के अनुसार आरक्षण का निर्धारण जनसंख्या के अनुपात से किया जाता है। चूंकि तीनों नगर निगमों में एसटी का प्रतिशत तय सीमा से कम रहा, इसलिए आरक्षण लागू नहीं हो पाया।
पहले इन पदों के एसटी वर्ग के लिए आरक्षित होने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन अंतिम आंकड़ों ने स्थिति स्पष्ट कर दी। अब सरकार की मंजूरी के बाद चुनावी अधिसूचना जारी होने का रास्ता साफ हो गया है।
पंचायत चुनाव, महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण
प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर आरक्षण प्रक्रिया शुरू हो गई है। पंचायती राज विभाग ने नई अधिसूचना जारी करते हुए आरक्षण से जुड़े दिशा-निर्देश तय कर दिए हैं।
सरकार ने पूर्व प्रावधानों में संशोधन करते हुए नियम 28, 87, 88 और 89 में नए प्रावधान जोड़े हैं, जिससे पंचायत चुनावों में आरक्षण प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है।
अधिसूचना के अनुसार आरक्षण की गणना वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर की जाएगी, जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 1993-94 के सर्वेक्षण आंकड़े मान्य होंगे।
नए नियमों के तहत ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के कुल पदों में से 50 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित रखे जाएंगे, जिससे स्थानीय निकायों में महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा।
आरक्षण रोस्टर में अनुसूचित जाति (एससी) को प्राथमिकता दी जाएगी, इसके बाद अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षण लागू होगा।
यदि किसी पंचायत या वार्ड में संबंधित वर्ग की जनसंख्या 5 प्रतिशत से कम है, तो वहां उस वर्ग के लिए आरक्षण लागू नहीं किया जाएगा।
इसके अलावा पंचायत समिति और जिला परिषद स्तर पर ओबीसी वर्ग को उनकी जनसंख्या के अनुपात में अधिकतम 15 प्रतिशत तक आरक्षण दिया जाएगा।
वहीं अनुसूचित क्षेत्रों में अध्यक्षों के सभी पद अनिवार्य रूप से अनुसूचित जनजाति के लिए ही आरक्षित रहेंगे, जिससे इन क्षेत्रों में जनजातीय प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।
आरक्षण रोस्टर को 7 अप्रैल तक हर हाल में जारी करने के आदेश
वहीं हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण रोस्टर 7 अप्रैल तक हर हाल में जारी करने के आदेश दिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि रोस्टर 13 फरवरी 2026 की स्थिति के आधार पर तैयार किया जाए और उसी आधार पर पंचायत चुनाव करवाए जाएं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य में 13 फरवरी 2026 के बाद गठित नई पंचायतों, पुरानी पंचायतों के विभाजन और पुनर्गठन से जुड़ी अधिसूचनाओं को चुनौती देने वाले मामलों का फैसला बाद में मेरिट के आधार पर किया जाएगा। फिलहाल इनसे संबंधित प्रक्रिया पर रोक जारी रहेगी।

