नाहन में ताजिया के आयोजन को लेकर विवाद, सुन्नी समुदाय के भिड़े दो गुट

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सिरमौर – नरेश कुमार राधे

हिमाचल प्रदेश के नाहन शहर में करीब 160 साल से इस्लाम का सुन्नी समुदाय मुहर्रम पर ताजिए का जुलूस निकालता आ रहा है। इस बार धार्मिक आयोजन को लेकर सुन्नी समुदाय के भीतर ही दो पक्षों में टकराव की स्थिति पैदा हो गई। बीती रात से इस मसले पर तनाव बना हुआ है। झड़प में एक पक्ष के तीन व्यक्तियों को चोटे भी लगी है। इसमें से दो को मेडिकल कॉलेज में दाखिल किया गया है।

करीब एक से डेढ़ सप्ताह पहले उपमंडल दंडाधिकारी की अदालत से ये आदेश आया था कि मुहर्रम पर ताजिए का जुलूस निकालने के लिए अंजुमन इस्लामिया ही अधिकृत है, लेकिन आपस में तनाव बना रहा।

दरअसल, एक पक्ष ये चाहता था कि मुहर्रम पर ताजिए के आयोजन को लेकर एक अलग समिति गठित की जाए। बताया जा रहा है,बीती रात टकराव के हालात पैदा हुए थे। बुधवार सुबह ताजिया के जुलूस से पहले टकराव हो गया।

बता दें कि शहर में एक भी शिया परिवार नहीं है। एक भी परिवार होने की स्थिति में अलग से ताजिया कमेटी को अनिवार्य तौर पर गठित किया जा सकता था। हालांकि, पुलिस आपसी टकराव को लेकर दोनों पक्षों के बयान कलमबद्ध कर रही है, लेकिन बताया जा रहा है कि ताजिया कमेटी गठित करने की मांग करने वाले पक्ष की अंजुमन इस्लामिया के अध्यक्ष से धक्का-मुक्की हुई।

धक्का-मुक्की करने वाले माफी मांगने को तैयार थे,लेकिन आरोप के मुताबिक उन पर हमला कर दिया गया। झड़प के दौरान ही तीन-चार लोगों को मामूूली चोटें आई। समूचे देश में इस बात की मिसाल दी जाती थी कि नाहन शहर इकलौता है, जहां पर शिया संप्रदाय की रिवायत को सुन्नी समुदाय द्वारा निभाया जाता है।

बता दें कि शिया मुसलमानों की धार्मिक प्रथाएं व मान्यता सुन्नी समुदाय से अलग होती हैं। इसी बीच खबर यह भी है कि पुलिस ने ताजिया के जुलूस को लेकर सुरक्षा के भी अतिरिक्त प्रबंध किये है। घायल साहिल ने कहा कि वो केवल ताजिए के जुलूस को लेकर प्रशासनिक अनुमति की बात कर रहे थे, लेकिन उन पर हमला कर दिया गया। साथ ही बचाने वाले दो-तीन लड़कों को भी पीटा गया।

एसडीएम सलीम आजम के बोल

एसडीएम सलीम आजम ने कहा कि करीब एक-डेढ़ सप्ताह पहले इस विवाद पर अंतिम आदेश जारी कर दिए गए थे। सुनवाई के दौरान बुुजुर्ग मुस्लिमों के भी बयान लिए गए। साथ ही साक्ष्य भी जुटाए गए। उन्होंने कहा कि इस दौरान ये बात सामने आई थी कि सिरमौर रियासत के शासक शमशेर प्रकाश के कार्यकाल के दौरान ये रिवायत शुरू हुई थी।

उन्होंने कहा कि 2014 की एक अधिसूचना के मुताबिक धार्मिक संस्था को उसी सूरत में पंजीकृत किया जा सकता है, जब पहले से पंजीकृत संस्था द्वारा एनओसी दी जाए। उन्होंने कहा कि अंजुमन इस्लामिया द्वारा ताजिया कमेटी के गठन को लेकर एनओसी नहीं दी गई थी। एसडीएम ने कहा कि दूसरे पक्ष को अपील दायर करने का भी अधिकार होता है।

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