धर्मशाला स्टेडियम से 25 हजार दर्शकों की निकासी : बेमिसाल योजना, जीरो अफरा-तफरी

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हिमखबर डेस्क

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में दिल्ली व मुंबई के आईपीएल मैच के दौरान अचानक 25 हज़ार दर्शकों को मात्र 20 से 30  मिनट में सुरक्षित निकाल लिया गया। यह ऑपरेशन आपात प्रबंधन, सुरक्षा रणनीति और टीमवर्क का बेहतरीन उदाहरण बनकर सामने आया।

हिमाचल प्रदेश में शायद ये पहली बार ही हुआ होगा जब 25 हजार लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से सुरक्षित निकाला गया हो,इस दौरान सबसे बड़ा खतरा अफवाह फैलने का रहता है। बताया जा रहा है कि मैच से पहले ही भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की स्थिति को देखते सुरक्षा तंत्र को अंदेशा था कि किसी भी समय स्थिति गंभीर हो सकती है।

सूत्रों के अनुसार कुछ स्तरों पर मैच को रद्द करने की चर्चा भी हुई थी। मैच स्थगित न होने पर हिमाचल प्रदेश पुलिस और अन्य एजेंसियों ने हर संभावित खतरे से निपटने की तैयारी शुरू कर दी। इस दौरान जो सबसे अहम कदम उठाया गया, वह था — पूर्व नियोजित इमरजेंसी इवैक्यूएशन प्लान।

धर्मशाला स्टेडियम के अंदर और बाहर से जुड़े हर पहलू की माइक्रो लेवल पर योजना बनाई गई। हर स्टॉल, दरवाजा, एग्जिट गेट की स्थिति,पब्लिक अनाउंसमेंट और चाबियों की जिम्मेदारी तक निर्धारित थी। सुरक्षा कर्मियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि किस स्थिति में क्या करना है और उनकी व्यक्तिगत भूमिका क्या होगी।

मैच शुरू होते ही स्टेडियम के अंदर सभी एग्जिट गेट खोल दिए गए थे। विशेष रूप से यह सुनिश्चित किया गया कि दर्शकों को घबराहट न हो और पूरा रेस्क्यू सुचारू रूप से संचालित हो। स्टेडियम के बाहर खड़े करीब 4000 छोटे-बड़े वाहनों को भी कंट्रोल और निर्देशित किया गया, ताकि ट्रैफिक में बाधा न हो।

विशेष ध्यान इस बात पर दिया गया कि धर्मशाला स्टेडियम, पाकिस्तान सीमा से केवल 85 किलोमीटर की हवाई दूरी पर स्थित है। ऐसे में संभावित मिसाइल हमले से ज्यादा खतरा भगदड़ के दौरान जनहानि से था। इसी संदर्भ में वनगढ़ बटालियन और कांगड़ा QRT भी हाई अलर्ट पर रखी गई थी।

इसी बीच नूरपुर के निकट एक तोप का गोला मिलने की सूचना ने सुरक्षा एजेंसियों को और भी सतर्क कर दिया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हाई लेवल अलर्ट पर कार्रवाई की गई और तय रणनीति के अनुसार हर एजेंसी ने अपनी जिम्मेदारी निभाई।

पुलिस अधीक्षक शालिनी अग्निहोत्री के बोल

कांगड़ा की पुलिस अधीक्षक शालिनी अग्निहोत्री ने बताया कि “इस ऑपरेशन को अंजाम देने में केवल 20 मिनट का समय लगा, जिसमें एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, होमगार्ड, कांगड़ा पुलिस, वनगढ़ बटालियन की क्विक रिस्पॉन्स टीम सहित लगभग 200 से अधिक कर्मियों ने भाग लिया।”

उन्होंने यह भी बताया कि “स्टेडियम को खाली करने की पूर्व ड्रिल दोपहर में ही करवा दी गई थी ताकि हर जवान को पता हो कि उसकी जिम्मेदारी क्या है।” यह ऑपरेशन साबित करता है कि जब संकल्प, समन्वय और सतर्कता एक साथ हों, तो सबसे बड़ी चुनौती भी नियंत्रण में लाई जा सकती है।

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