धर्मशाला के कंड करडिय़ाना में बनेगा इसरो का सेंटर, हिमालय से होगा स्पेश का अध्ययन, संगठन ने दो एकड़ भूमि का भरी हामी

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वल्र्ड क्लास टेलिस्कोप स्थापित कर हिमालय से होगा स्पेश का अध्ययन, संगठन ने दो एकड़ भूमि का भरी हामी

हिमखबर डेस्क

अब हिमालय धौलाधार की वादियों से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो अंतरिक्ष के गूड रहस्यों का अध्ययन करेगा। इसके लिए हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला के साथ लगते कंड करडिय़ाना की पहाडिय़ों में 41 करोड़ का इसरो सेंटर स्थापित किया जाएगा।

जिसमें वल्र्ड क्लास टेलिस्कोप स्थापित कर हिमालय से स्पेश का अध्ययन किया जाएगा। इसके लिए इसरो की ओर से हिमाचल प्रदेश सीयू धर्मशाला को प्रोजेक्ट सौंपा गया है। इसरो की ओर से टेलिस्कोप को अंधेरे वाले स्थान में स्थापित करने की शर्त रखी गई थी।

इसके चलते ही अब जदरांगल से चयनित भूमि को बदलकर कंड करडिय़ाना में सीयू को आंबटित जमीन में से ही दो एकड़ भूमि फाइनल की गई है, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो ने हामी भर दी है, हालांकि इससे पहले सही स्थान न मिलने पर इसरो टेलिस्कोप सेंटर को मांउट आबू में शिफ्ट किए जाने को लेकर जोर-अजमाइश शुरू कर दी गई थी।

हालांकि अब सीयू धर्मशाला को पहले चरण के तहत रािश उपलब्ध करवा दी गई है, जबकि आगामी उपकरणों को स्थापित करने के लिए भी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सीयू हिमाचल प्रदेश धर्मशाला के साथ मिलकर इसरो मिलकर इस बड़ी एवं महत्तवाकांक्षी परियोजना पर काम कर रहा है।

इसरो ने अपने नेत्रा प्रोजेक्ट के लिए सीयू के साथ एमओयू किया है। इसके लिए प्रारंभिक कार्य के लिए करीब 15 से 18 लाख रुपए की राशि भी जारी कर दी गई है। सीयू के स्पेस सांइस विभाग की टीम ने टेस्टिंग शुरू कर दी है। यहां देखा जाएगा कि सेटेलाइट के आसपास कोई खतरा तो नहीं है।

ऐसा होने पर धर्मशाला का यह केंद्र राष्ट्रीय सुरक्षा में अहम योगदान देने वाला है। सेटेलाइट के स्थापित होने पर यहां देश-दुनिया के लोग अंतरिक्ष, चांद, तारों एवं अन्य ग्रहों को देख सकेंगे, और अध्ययन कर पाएंगे।

41 करोड़ रुपए होंगे खर्च

केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने बताया कि इसरो की ओर से प्रदान किए गए इसरो टेलिस्कोप सेंटर के लिए अब कंड करडिय़ाना में दो एकड़ भूमि फाइनल की गई है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एवं अंतरिक्ष अनुसंधान में अनेक नई संभावनाओं को जन्म देने वाले इस प्रोजेक्ट के लिए विवि प्रशासन व स्पेस साइंस विभाग ने कड़ी मेहनत की है। इस परियोजना पर 41 करोड़ से अधिक खर्च होंगे। इसरो के साथ सीयू का समझौता होना बड़ी बात है। साथ ही हिमाचल धर्मशाला स्पेस साइंस में उतर भारत के एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित होगा।

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