
हमीरपुर – अनिल कपलेश
सिविल हॉस्पिटल बड़सर में टेस्ट रिपोर्ट को लेकर जमकर हंगामा हुआ है। आरोप है कि तेरह वर्षीय लडक़ी को गले में खऱाश व बुख़ार की शिकायत लेकर जब परिजन बड़सर अस्पताल लेकर गए, तो उसका टायफ़ाइड का टेस्ट करने के लिए लिखा गया। अस्पताल की लैब में जब जांच की गई तो बच्ची को टायफ़ाइड पाजिटिव बताया गया। तीन दिनों तक बच्ची टाइफ़ाइड की दवाइयाँ खाती रहीं।
इसी बीच परिजनों को लगा की बच्ची को एसी कोई शिकायत नहीं लग रही, तो उन्होंने अस्पताल परिसर के बाहर निज़ी लैब में टेस्ट करवाया द्य जिसमें उसकी रिपोर्ट नेगेटिव पाई गई। संतुष्टि के लिए एक ओर निज़ी लेब में टेस्ट करवाया गया, तो वहां भी टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव पाई गई।
इसके बाद परिजन शिकायत लेकर बड़सर अस्पताल पहुंचे तथा स्वास्थ्य अधिकारियों से कारण जानने का पर्यास किया। हालांकि इसी बीच घटनाक्रम में राजनीतिक एंट्री भी हो चुकी थी। आम आदमी पार्टी के मीडिया प्रभारी रमेश शर्मा अपने समर्थकों के साथ अस्पताल परिसर पहुंच कर नारेबाज़ी करने लगे।
रमेश का कहना है कि बड़सर अस्पताल में कुछ भी सही नहीं चल रहा। मरीज़ों को ग़लत रिपोर्ट देकर उनकी जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। इसके बाद बीएमओ बड़सर खुद धरनास्थल पर पहुंचे तथा भीड़ को शांत करने का प्रयास किया।
बच्ची के पिता सतीश का कहना है की मैंने मेडिकल एक्सपट्र्स से बात की है, तो मुझे पता चला कि एसा संभव नहीं है कि तीन दिनों में रिपोर्ट नेगेटिव आ जाए। मेरा रोष सिर्फ़ इतना है कि आगे से ग़लत रिपोर्ट द्वारा किसी के जीवन से खिलवाड़ न हो।
बीएमओ बड़सर का कहना था कि टेस्ट के दौरान ब्लड मार्कर आ सकते हैं, लेकिन इसके द्वारा बीमारीकनफ़र्म नहीं हो सकती। कन्फ़र्म करने के लिए ब्लड कल्चर करवानी पड़ती है। डाक्टर के इलाज़ से मैं संतुष्ट हूं ओर अगर किसी ओर सीनियर डाक्टर से राय ली जाएगी, तो उनका भी यही जवाब होगा।
हमने पहले भी इनको कई बार समझाया है कि अगर इलाज में कोई कमी है या मेरी बातों से संतुष्ट नहीं हैं, तो लिखित में शिकायत कीजिय लेकिन एसे हंगामा करना ठीक नहीं है।
