हॉस्पिटल शुरू होने सेे पहले ही तोड़ रहा दम, दीवारों की पहले भी हो चुकी है मरम्मत, छह साल से मरीजों को नहीं मिली सुविधा
काँगड़ा – राजीव जस्वाल
डाक्टर राजेंद्र प्रसाद आयुर्विज्ञान चिकित्सा महाविद्यालय टांडा अस्पताल में नवनिर्मित 44 करोड़ की लागत से बने जीएसबाली मदर एंड चाइल्ड अस्पताल के भवन के 100 से अधिक दरवाजों को उखाड़ दिया गया है। बरसात की पहली बारिश के बाद भवन की दीवारों में आई दरारों को तो दिव्य हिमाचल में खबर छपने के बाद ठीक कर दिया गया है, लेकिन अब 100 से अधिक दरवाजों की सांसे भी फूल गई हैं जिसके चलते इन दरवाजों को उखाड़ कर नए दरवाजे लगाए जाएंगे।
2018 में जीएसबाली मदर एंड चाइल्ड अस्पताल बनने शुरू हुआ था, लेकिन छ साल बाद भी अभी तक मरीजों को इसकी सुविधा नहीं मिल पाई है। हालांकि सीएम सुक्खू के द्वारा नगरोटा बगवां से इस भवन का वर्चुअल उद्घाटन हो चुका हैं। इस अस्पताल के शुरू होने से पहले ही इसके 100 से अधिक दरवाजों की सांसें भी फूल गई हैं और ये दरवाजे फूल गए है।
जिसके कारण इन दरवाजों को उखाड़ कर प्रवेश हाल में रखा गया है अब इन दरवाजों को जिस कंपनी से लाया गया था। उन्हें वापिस किया जा रहा है और नए दरवाजों को लाकर दुबारा फिट किया जाएगा। लेकिन हैरानी की बात है की छ: साल से बन रहे इस भवन को अभी शुरु भी नहीं किया जा सका है और इसके दरवाजों का बिना इस्तेमाल ही खराब होना असहज और असमंजस की स्तिथि से हैरान करने वाला है।

बता दें की प्रदेश के दुसरे बड़े टांडा अस्पताल में गायनी विभाग में 50 बिस्तरों के कारण इसे बढ़ाकर 200 बिस्तर का किया गया था। टांडा अस्पताल में अभी तक गायनी विभाग में केवल 50 बिस्तरों की सुविधा है जिसके कारण गर्भवती महिलाओं को बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है कई वार तो सीमित बिस्तर होने के कारण बिस्तर भी नहीं मिल पाते हैं।
गर्भवती महिलाओं को कोई भी असुविधा ना हो इसलिए जीएसवाली मदर एंड चाइल्ड अस्पताल भवन का अलग से निर्माण किया गया है। अस्पताल के बनने से प्रदेश के छ: जिलों चंबाए हमीरपुर, ऊना, मंडी, कुल्लूए और 15 लाख से ज्यादा की आबादी वाले सबसे बड़े जिला कांगडा से यहां उपचार कराने आने वाले मरीजों को इसकी सुविधा का लाभ मिलेगा।
सीपीडब्लूडी के अधिकारियों का कहना है कि जीएसबाली मदर एंड चाइल्ड अस्पताल के भवन के दरवाजों की फिल्म लेमिनेशन उखड़ गया है, जिसके चलते जिस कंपनी से इन्हें लिया है उन्हें लोटाकर नए दरवाजे लाए जा रहे हैं ताकि पानी के संपर्क से ये न फूलें।

