
परागपुर और डाडासीबा के जनऔषधि केन्द्रों में हर मरीज के लिए हैं निशुल्क दवाईयां उपलब्ध
डाडासीबा- शिव गुलेरिया
आज के मंहगाई के दौर में अगर दुर्भाग्य से कोई व्यक्ति बीमार हो जाए तो उक्त परिवार का सारा गणित ही बदल जाता है। दवाईयों के खर्च घर के राशन व अन्य चीजों पर भारी पड़ने लगते हैं आैर बीमारी अगर लंबी चले तो निश्चित तौर पर परिवार कर्ज के बोझ तले दब जाता है। इस भयावह स्थिति से उबरने में परिवार की पूरी पीढ़ी को संघर्ष करना होता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जब कैप्टन संजय ने ऐसे केस स्टडी किए, तो उनका मन पसीज गया। इसके बाद पराशर ने न सिर्फ परागपुर और डाडासीबा में सस्ती दवाईयां उपलब्ध करवाने के लिए दो प्रधानमंत्री जनऔषधि केन्द्र खोले, बल्कि कई गरीबों के आर्थिक हालात देखकर इन केन्द्रों में अब सभी मरीजों के लिए दवाईयां नि:शुल्क कर दी गई हैं।
बेशक संजय पराशर द्वारा संचालित जेनरिक दवाओं के खोले गए जन औषधि केंद्र गरीब मरीजों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं और बड़ी संख्या में मरीज हर रोज डॉक्टर की पर्ची से दवाईयां ले रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से पराशर दस लाख रूपए से ज्यादा की दवाईयों की चैरिटी कर चुके हैं।
दरअसल स्वास्थ्य के क्षेत्र में पराशर कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। मेडीकल कैंपाें के आयोजन से लेकर जनऔषधि केन्द्रों के माध्यम से संजय लगातार समाज के गरीब वर्ग को राहत पहुंचा रहे हैं। इससे पहले कोरोना की दूसरी लहर में भी पराशर ने करोड़ों रूपए की दवाईयां स्वास्थ्य विभाग को मुहैया करवाई थीं।
वहीं, औषधि केन्द्रों में दवाईयां निशुल्क करने के पीछे पराशर की सोच थी कि क्षेत्र के अस्पतालों में सस्ती दवाईयों की कोई दुकान नहीं है। मेडीकल कैंपों में भी कई ग्रामीणों ने फीडबैक दी कि वे महंगी दवाईयां खरीदने में असमर्थ हैं और कई बार बीमारी से समझौता कर लेना भी उनकी मजबूरी होती है।
एेसे में पहले चरण में संजय ने 75 वर्ष की आयु से ऊपर सभी बुजुर्गों को मुफ़्त दवाईयों का वितरण शुरू किया तो दूसरे चरण में सभी के लिए में भी कई मरीजों को दवाईयां मुफ्त में देने का निर्णय लिया।
नंगल चौक से कमला देवी, तियामल से रवि दत्त, चन्नौर से संजीव कुमार, गुरनबाड़ से हरि दास, सांडा से संदेश कुमारी, और कटोह टिक्कर से अरूण ने बताया कि संजय पराशर के सौजन्य से उन्होंने जनऔषधि केंद्रों में निशुल्क दवाईयां प्राप्त की। जिन मंहगी दवाईयों को वे खरीदने में असमर्थ थे, उन्हें संजय ने बिना किसी कीमत के उपलब्ध करवाया।
सलेटी से बुजुर्ग सुखराम और पुनणी से तिलक राज ने बताया कि पराशर से उन्होंने दवाईयां मंगवाई थीं और दो दिनों के भीतर ही संजय की टीम ने दवाईयों की होम डिलीवरी कर दी। जंबल से बलवंत सिंह बताते हैं कि उन्होंने आज तक स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपने संसाधनों से पराशर की तरह किसी को और को जनसेवा करते हुए नहीं देखा है।
जिन दवाओं के अभाव में लोग बीमारी के साथ जीने को विवश थे, अब वे सभी को निशुल्क मिल रही हैं। कैप्टन संजय का कहना था कि दवाईयां कोई भी व्यक्ति शौक से नहीं खरीदता है। शारीरिक दुख-दर्द जब बढ़ जाता है तो ही मरीज दवा लेने को विवश होते हैं।
ऐसे में गरीब मरीजों को निःशुल्क दवाईयां उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया। कहा कि जसवां-परागपुर क्षेत्र स्वस्थ रहे, इसके लिए भगवान से प्रार्थना के साथ औषधि केन्द्रों में यह व्यवस्था की गई हैं।
