छात्र किताब नहीं लाया तो टीचर ने सहपाठियों से जड़वा दिए थप्पड़, ऐसे उजागर हुआ मामला

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चम्बा – भूषण गुरूंग 

सरकार की गाइडलाइन के तहत बच्चे को पीटना तो दूर, उसे घूरने तक की मनाही है। इसके बावजूद प्रदेश के स्कूलों में बच्चों के साथ मारपीट के मामले थम नहीं रहे हैं।

पहले जिला कुल्लू के शमशी, फिर गोहर के एक स्कूल में बच्चे की बेरहमी से पिटाई के बाद अब जिला चम्बा के एक स्कूल में किताब न लाने पर टीचर ने विद्यार्थी को सहपाठियों से थप्पड़ जड़वा दिए।

एक के बाद एक विद्यार्थियों ने बच्चे को थप्पड़ मारे। बड़ी बात यह है कि स्कूल प्रबंधन ने घटना की उच्चाधिकारियों को सूचना तक नहीं दी और यह मामला स्कूल में ही दफन करने का प्रयास किया।

लेकिन शनिवार को बच्चे को चैकअप के लिए मेडिकल काॅलेज एवं अस्पताल चम्बा लाया गया। इसके बाद मामला उजागर हुआ।

छठी कक्षा में पढ़ता है पीड़ित

पीड़ित बच्चा छठी कक्षा में अध्ययनरत है। बच्चे ने बताया कि उसकी किताब गुम हो गई थी। कक्षा में टीचर ने किताब के बारे में पूछा तो उसने एक बच्चे के बैग में किताब ढूंढने की कोशिश की।

इसके बाद टीचर ने कहा कि जिस बच्चे के बैग में किताब नहीं मिली तो वह उसे थप्पड़ मारेगा। इस तरह एक-एक करके कक्षा के विद्यार्थियों ने थप्पड़ लगाए।

बच्चे ने यह भी बताया कि टीचर ने प्रधानाचार्य के समक्ष उसके अभिभावकों के बारे में अपशब्द कहे।

प्रधानाचार्य को स्कूल के शिक्षकों ने दी जानकारी 

हालांकि इस मामले में बच्चे के अभिभावकों व शिक्षकों में समझौता हो गया है लेकिन इससे शिक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।

स्कूल के प्रधानाचार्य ने बताया कि वीरवार को ही स्कूल के शिक्षकों ने उन्हें इस घटना की जानकारी दी। इसके बाद टीचर को दोबारा ऐसा न करने की हिदायत दी गई है।

उन्होंने कहा कि सोमवार को स्टाफ की बैठक की जाएगी और उन्हें सरकार की गाइडलाइन के बारे में अवगत करवाया जाएगा और इस मामले को लेकर चर्चा की जाएगी।

मामले की जांच कर नियमानुसार होगी कार्रवाई 

उपनिदेशक उच्च शिक्षा प्यार सिंह चाढ़क ने बताया कि इस संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई थी।

जब प्रधानाचार्य से बात हुई तो उन्होंने स्थिति से अवगत करवाया लेकिन इस तरह की घटना की तुरंत सूचना देनी चाहिए थी।

मामले की जांच की जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। स्कूलों में बच्चों को पीटने पर प्रतिबंध है। यहां तक कि उन्हें घूरने तक की भी मनाही है। शिक्षकों को समय-समय पर इस संबंध में जागरूक किया जा रहा है।

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