
सर्वे को पहुंचे कंपनी के टेक्रिकल एक्सपर्ट्स ने अधिकारियों के साथ किया ज्वाइंट विजिट
बिलासपुर – सुभाष चंदेल
बिलासपुर की गोबिंदसागर झील में समाहित पौराणिक मंदिरों के पुर्नस्थापन एवं जीर्णोद्धार के लिए तैयार की गई 1400 करोड़ रूपए लागत की महत्त्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने की कवायद शुरू हो चुकी है। इस परियोजना की डीपीआर देश की नामी मल्टीनेशनल लारसन एंड टर्बाे (एल एंड टी) लिमिटेड कंपनी बनाएगी।
उपायुक्त पंकज राय, एडीसी अनुराग चंद्र सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ ही कंपनी के टेक्रिकल एक्सपर्ट टीम ने ज्वाइंट विजिट कर आगे की कार्ययोजना पर चर्चा कर सर्वे किया है। खास बात यह है कि गुजरात के स्टैच्यू ऑफ युनिटी के मॉडल को स्टडी कर इस बड़ी परियोजना को मूर्तरूप देने की कोशिश होगी।
राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट को बजट बुक में डाला है और पहले चरण के लिए 100 करोड़ रुपए का बजट भी स्वीकृत कर दिया है।
बिलासपुर की झील में पानी के बीच अपलिफ्ट किए जाने मंदिरों का यह प्रोजेक्ट पूरे हिमाचल प्रदेश में एक बड़ा आकर्षण का केंद्र बनेगा और यह शहर प्रदेश का ऐसा पहला शहर होगा, जहां एक भव्य धार्मिक पर्यटन स्थल तैयार होगा।
शुक्रवार को लारसन एंड टब्रो कंपनी की टेक्रिकल एक्सपर्ट टीम ने उपायुक्त पंकज राय व अन्य अधिकारियों के साथ ज्वाइंट विजिट किया और प्रारंभिक सर्वेक्षण भी किया। जल्द ही डीपीआर तैयार करने के लिए प्रक्रिया शुरू होगी।
इस परियोजना में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने खासी दिलचस्पी ली और आने वाले समय में इस परियोजना का शिलान्यास करवाए जाने की भी योजना है।
उधर, इस संदर्भ में जब उपायुक्त पंकज राय से बात की गई तो उन्होंने बताया कि 1400 करोड़ लागत की इस परियोजना को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। योजना के तहत जलमग्र मंदिरों को नाले के नौण के पास पुनस्र्थापित किया जाएगा।
इससे पहले नाले के नौण को योजनाबद्ध तरीके से डिवेलप किया जाएगा। इसी परियोजना के दूसरे चरण में सांडू के मैदान को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। तीसरे चरण में मंडी भराड़ी के पास बैराज बनाकर मंदिरों के आसपास एक जलाशय विकसित किया जाएगा।
