
नालागढ़, 12 दिसंबर – रजनीश ठाकुर
कहते हैं, भगवान जो करता है भले के लिए ही करता है। विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले कांग्रेस के लखविंदर सिंह राणा ने भाजपा का दामन थाम लिया, इसके कुछ अरसे बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर नालागढ़ पहुंचते हैं।
पूर्व विधायक केएल ठाकुर भी मुख्यमंत्री की जीप में चढ़ने का प्रयास करते हैं, लेकिन उन्हें जीप में जगह मिलने की बजाय धक्का मिलता है। इस पल का वीडियो सोशल मीडिया में भी जमकर वायरल हुआ था।
बता दें कि 2017 में राणा ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर भाजपा के प्रत्याशी केएल ठाकुर को हराया था। अहम बात यह भी है कि सीएम जयराम ने नालागढ़ दौरे पर पूर्व विधायक और भाजपा के वरिष्ठ नेता केएल ठाकुर को भाषण के दौरान जबरदस्ती बैठाते नजर आए थे।
उन्हें मंच पर भी खड़ा नहीं होने दिया जा रहा था। यहां पार्टी में नए नवेले शामिल हुए लखविंदर सिंह राणा को मंच पर तवज्जो दी गई। लेकिन आखिर में यह भाजपा के लिए महंगी साबित हुई।
आप देखिए, समय बदल गया है। जयराम ठाकुर पूर्व मुख्यमंत्री हो गए हैं तो सुखविंदर सिंह सुक्खू सूबे के नए मुख्यमंत्री। बात रविवार की हो रही है, नालागढ़ के नवनिर्वाचित विधायक केएल ठाकुर शिमला में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को बधाई देने पहुंचे।
इसके बाद केएल ठाकुर समर्थकों सहित शपथ ग्रहण समारोह की तरफ पैदल ही चल पड़े। कुछ देर बाद मुख्यमंत्री का काफिला आ
गया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने देखा कि केएल ठाकुर पैदल जा रहे हैं तो तपाक से अपनी गाड़ी में बिठा लिया। यही नहीं, पूरे सम्मान के साथ मुख्यमंत्री ने ठाकुर को मंच पर भी जगह दिलाई। लिहाजा वो कहावत सही साबित हो गई, जिसमें कहा जाता है कि “जो होता है, वो अच्छे के लिए ही होता है”।
यदि केएल ठाकुर ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा होता तो शायद परिणाम विपरीत भी हो सकता था। कांग्रेस की लहर में सहानुभूति नहीं मिलती, हिमाचल में पांच साल बाद सरकार बदलने का रिवाज है। भाजपा के टिकट पर यदि जीत भी जाते और सरकार कांग्रेस की बन जाती तो भी नालागढ़ विधानसभा क्षेत्र को नुकसान होता।
अपने मुख्यमंत्री के सरकार में बेरुखी मिली तो पराये ने इतना सम्मान दिया कि शायद ठाकुर भावुक हो गए होंगे। उल्लेखनीय है कि भाजपा को नालागढ़ विधानसभा क्षेत्र में तीसरे नंबर पर संतोष करना पड़ा है।
निर्दलीय प्रत्याशी केएल ठाकुर चुनाव जीते तो कांग्रेस प्रत्याशी को दूसरा स्थान मिला। ऐसे में यह भी साफ है कि असली टिकट जनता के पास है।
पहाड़ी प्रदेश में ये रिवायत भी रही है कि निर्दलीय चुनाव जीतने वाले सत्ता पक्ष के साथ ही एसोसिएट विधायक बनकर चलते है। 2007 के बाद से विधानसभा क्षेत्र का विधायक विपक्ष में ही बैठ रहा है लेकिन इस बार फ़िज़ा बदली बदली लग रही है।
